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2583 Fri 6th Apr 2018 LESSON in 38 Classical Hindi- क्लासिकल हिंदी Awakeness Practices All 84,000 Khandas As Found in the Pali Suttas Traditionally the are 84,000 Dharma Doors - 84,000 ways to get Awakeness. Maybe so; certainly the Buddha taught a large number of practices that lead to Awakeness. This web page attempts to catalogue those found in the Pali Suttas (DN, MN, SN, AN, Ud & Sn 1). There are 3 sections: The discourses of Buddha are divided into 84,000, as to separate addresses. The division includes all that was spoken by Buddha.”I received from Buddha,” said Ananda, “82,000 Khandas, and from the priests 2000; these are 84,000 Khandas maintained by me.” They are divided into 275,250, as to the stanzas of the original text, and into 361,550, as to the stanzas of the commentary. All the discourses including both those of Buddha and those of the commentator, are divided into 2,547 banawaras, containing 737,000 stanzas, and 29,368,000 separate letters. http://www.buddha-vacana.org/ BuddhaSasana-The Home of Pali Buddha Vacana — The words of the Buddha — Classical Buddhism (Teachings of the Awakened One with Awareness) belong to the world, and everyone have exclusive rights: is the most Positive Energy of informative and research oriented site propagating the teachings of the Awakened One with Awareness the Buddha and on Techno-Politico-Socio Transformation and Economic Emancipation Movement followed by millions of people all over the world. Rendering exact translation as a lesson of this University in one’s mother tongue to this Google Translation https://translate.google.com and propagation entitles to become a Stream Enterer (Sottapanna) and to attain Eternal Bliss as a Final Goal. Analytic Insight-Net - FREE Online Analytic Insight-Net Tipiṭaka Research & Practice University and related NEWS through 
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Filed under: General, Vinaya Pitaka, Sutta Pitaka, Tipiṭaka, ವಿನಯಪಿಟಕ, ತಿಪಿಟಕ (ಮೂಲ)
Posted by: @ 3:51 am

2583 Fri 6th Apr  2018 LESSON


in  38 Classical Hindi- क्लासिकल हिंदी

Awakeness Practices

All 84,000 Khandas As Found in the Pali Suttas

Traditionally
the are 84,000 Dharma Doors - 84,000 ways to get Awakeness. Maybe so;
certainly the Buddha taught a large number of practices that lead to
Awakeness. This web page attempts to catalogue those found in the Pali
Suttas (DN, MN, SN, AN, Ud & Sn 1). There are 3 sections:

The
discourses of Buddha are divided into 84,000, as to separate addresses.
The division includes all that was spoken by Buddha.”I received from
Buddha,” said Ananda, “82,000 Khandas, and  from the priests 2000; these
are 84,000 Khandas maintained by me.” They are divided into 275,250, as
to the stanzas of the original text, and into 361,550, as to the
stanzas of the commentary. All the discourses including both those of
Buddha and those of the commentator, are divided  into 2,547 banawaras,
containing 737,000 stanzas, and 29,368,000 separate letters.

http://www.buddha-vacana.org/

BuddhaSasana-The Home of Pali

 Buddha Vacana
— The words of the Buddha —
Classical Buddhism (Teachings of the Awakened One with Awareness) belong to the world, and everyone have exclusive rights:

is
the most Positive Energy of informative and research oriented site
propagating the teachings of the Awakened One with Awareness the Buddha
and on Techno-Politico-Socio Transformation and Economic Emancipation
Movement followed by millions of people all over the world.

Rendering
exact translation as a lesson of this University in one’s mother tongue
to this Google Translation https://translate.google.com and propagation
entitles to become a Stream Enterer (Sottapanna) and to attain Eternal
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Buddha

Buddha

Buddha

Buddha

Buddha

Buddha


Buddha


38 Classical Hindi
38 क्लासिकल हिंदी

2580 मंगल 2582 गुरु 3rd से 5 अप्रैल 2018 पाठ

http://www.orgsites.com/oh/awakenedone/

अविवेकी प्रथाएं

पली सूतस में पाए गए सभी 84,000 खण्डस

परंपरागत रूप से 84,000 धर्म के द्वार हैं- अवचेतन पाने के लिए 84,000 तरीके संभावित हो; निश्चित रूप से बुद्ध ने बड़ी संख्या में प्रथाओं को पढ़ाया, जो कि Awakeness यह वेब पेज पाली सूतस (डीएन, एमएन, एसएन, एएन, उद और एस 1 1) में पाए जाने वाले लोगों की सूची का प्रयास करता है। 3 अनुभाग हैं:

बुद्ध के प्रवचन को अलग-अलग पते के रूप में 84,000 में विभाजित किया गया है। इस
प्रभाग में बुद्ध द्वारा बोली जाने वाली सभी बातें शामिल हैं। “मैंने
बुद्ध से प्राप्त किया,” आनंद ने कहा, “82,000 खण्डस, और पुजारी 2000 से;
ये
मेरे द्वारा बनाए गए 84,000 खंडा हैं। “वे 275,250 में विभाजित किए गए
हैं, मूल पाठ के पदों के अनुसार, और 361,550 में, कमेंटरी के पदों के
अनुसार
बुद्ध और टीकाकारों के दोनों सहित सभी प्रवचनों को 2,547 बन्नारों में
विभाजित किया गया है, जिसमें 737,000 पन्नों और 29,368,000 अलग-अलग पत्र
शामिल हैं।

http://www.buddha-vacana.org/

बुद्धसासन-पाली का घर

 बुद्ध Vacana
- बुद्ध के शब्द -
शास्त्रीय बौद्ध धर्म (जागरूकता के साथ जागृत एक की शिक्षा) दुनिया से संबंधित हैं, और सभी के पास अनन्य अधिकार हैं:

जागरूकता, बुद्ध और तकनीक-राजनीतिक-सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति
आंदोलन के साथ जागृत व्यक्तियों की शिक्षाओं का प्रचार करने वाली दुनिया भर
में लाखों लोगों द्वारा पीछा जानकारीपूर्ण और अनुसंधान उन्मुख साइट की
सबसे सकारात्मक ऊर्जा है।

इस
यूनिवर्सिटी के एक पाठ के रूप में सटीक अनुवाद को Google अनुवादः
https://translate.google.com पर प्रसारित करें और एक स्ट्रीम इनटेरर
(सॉटापन्ना) बनने के लिए और अंतिम लक्ष्य के रूप में अनन्त आनंद प्राप्त
करने के लिए प्रचार प्राप्त करें।
विश्लेषणात्मक अंतर्दृष्टि-नेट - मुफ़्त ऑनलाइन विश्लेषणात्मक
अंतर्दृष्टि-निट टिपिका रिसर्च एंड प्रैक्टिस यूनिवर्सिटी और संबंधित न्यूज
द्वारा 105 क्लासिक भाषाओं में http://svajan.ambedkar.org के माध्यम से

 बुद्ध Vacana
- बुद्ध के शब्द -
पाली ऑनलाइन निःशुल्क और आसान तरीके से जानें

यह
वेबसाइट उन लोगों को समर्पित है जो पाली भाषा की मूलभूत बातें सीख कर
बुद्ध के शब्दों को बेहतर समझना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए उनके पास ज्यादा
समय नहीं है।
विचार
यह है कि यदि उनके उद्देश्य केवल पाली ग्रंथों को पढ़ने और उन्हें समझने
के लिए उचित महसूस करने के लिए सक्षम हो गए हैं, भले ही उस व्याकरण संबंधी
नियमों के सभी मिनट विवरणों को शामिल नहीं किया गया हो, उन्हें वास्तव में
बहुत खर्च करने की आवश्यकता नहीं है
कई घबराहट और संयुग्मन जैसी चीजों को शामिल करते हुए थकाऊ व्याकरणीय सिद्धांत के हतोत्साहित सीखने के साथ संघर्ष करने का समय

उस
स्थिति में, सबसे महत्वपूर्ण पली शब्दों के अर्थ को जानने के लिए खुद को
सीमित करने के लिए पर्याप्त है, क्योंकि पढ़ने का बार-बार अनुभव सबसे
सामान्य वाक्य संरचनाओं का अनुभवजन्य और सहज ज्ञान युक्त समझ प्रदान करता
है।
इस प्रकार वे अपने स्वयं के अध्ययन के समय, अवधि, आवृत्ति, सामग्री और गहराई को चुनने के लिए, स्वतः ऑटोडिडेट्स बनने में सक्षम हैं।

बुद्ध
Vacana की उनकी समझ अधिक सटीक हो जाएगी क्योंकि वे आसानी से सीखते हैं और
नियमित रूप से पढ़ने के तरीकों से शब्दों और बुद्ध के सिद्धांतों में
महत्वपूर्ण सूत्रों को याद करते हैं।
उनके सीखने और प्रेरणा से वे मिलते हैं और गहराई से बढ़ेगा क्योंकि शिक्षक के संदेश में उनकी ग्रहणशीलता में सुधार होगा।

अस्वीकरण: यह वेबसाइट एक स्व-ऑडिट द्वारा बनाई गई है और ऑटोऑडिडेट्स के लिए है। वेबमास्टर
ने किसी आधिकारिक पाली पाठ्यक्रम का पालन नहीं किया है और कोई दावा नहीं
है कि यहां प्रस्तुत सभी जानकारी त्रुटियों से पूरी तरह मुक्त है।
जो लोग अकादमिक परिशुद्धता चाहते हैं वे एक औपचारिक पाली पाठ्यक्रम में शामिल होने पर विचार कर सकते हैं। अगर पाठक किसी भी गलती को नोटिस करते हैं, तो वे ‘संपर्क’ के तहत उल्लिखित मेलबॉक्स के माध्यम से वेबमास्टर का आभारी होंगे।

सुत्ता पिकाका - दीघा निकारा

डीएन 9 -
पोपपाद सुत्ता
{} अंश
- पौधपाद के प्रश्न -

पोपाधडा ने संन की प्रकृति को पुनः प्राप्त करने वाले विभिन्न प्रश्न पूछे।
नोट: सादे ग्रंथों

http://www.buddha-vacana.org/suttapitaka.html
 
सुट्टा पिकाका
- प्रवचन की टोकरी -
[सूत: व्याख्यान]

सुट्टा पिकाका में धम्म के संबंध में बुद्ध की शिक्षा का सार शामिल है। इसमें दस हज़ार सूते से अधिक शामिल हैं यह पांच संग्रहों में विभाजित है जिसे निकियास कहा जाता है।

दीघा निकारा
    
[दीघा: लम्बी] दीघा निकारा बुद्ध द्वारा दिए गए सबसे लंबे समय के 34 वार्ताएं इकट्ठा करते हैं। विभिन्न संकेत हैं कि उनमें से बहुत से मूल मूलधन और संदिग्ध प्रामाणिकता के देर से बढ़ रहे हैं।
मेजहिमा निकारा
    
[मज्जिमः मध्यम] मर्जिमा निकारा विभिन्न मामलों से संबंधित मध्यवर्ती लंबाई के बुद्ध के 152 प्रवचन इकट्ठा करती है।
सैटुटा निकारा
    
[समयुक्ता: समूह] सैयदुता निकारा अपने विषय के अनुसार सूत इकट्ठा करते हैं, जिसमें 56 उप-समूह होते हैं जिन्हें सयुत्त कहते हैं। इसमें चर लंबाई के तीन हजार से अधिक व्याख्यान शामिल हैं, लेकिन आम तौर पर अपेक्षाकृत कम।

अंगुरा निकारा

    [एजी: कारक | उत्तारा:
अतिरिक्त] अंगुरा निकारा को ग्यारह उप-समूहों में निपटा नाम दिया गया है,
उनमें से प्रत्येक ने पूर्ववर्ती निपाता के विरुद्ध एक अतिरिक्त कारक की
गणनाओं को शामिल करने वाले प्रवचन इकट्ठा किए हैं।
इसमें हजारों सूता हैं जो आम तौर पर कम होते हैं।

खुदाक निकारा

    [खुद्ध:
छोटा, छोटा] खुधक निकारा लघु ग्रंथों को माना जाता है और इसे दो स्तरों से
समझा जाता है: धम्मपद, उदाना, इतिवत्तक, सूत्ता निपाता, थरगाथा-थिरागथ और
जाटका प्राचीन स्तर की रचना करते हैं, जबकि अन्य किताबें देर से बढ़ जाती
हैं और उनकी प्रामाणिकता
अधिक संदिग्ध है

http://www.buddha-vacana.org/formulae.html

पाली फॉर्मूला

यह
दृश्य जिस पर यह काम है, वह यह है कि सूत के अनुच्छेद जिन्हें बुद्ध
द्वारा बार-बार चारोंकारियों में दोहराया जाता है, यह दर्शाता है कि उनके
शिक्षण में रुचि के सबसे योग्य होने के नाते उन्हें क्या माना जाता है।
, और उसी समय के रूप में जो अपने सटीक शब्दों को सटीकता से दर्शाता है उनमें से आठ को गाका-मोग्गलन सूत्ता (एमएन 107) में पढ़ाया जाता है और
प्रशिक्षण के तहत एक के लिए सिक्का पिपिदा या पथ के रूप में वर्णित किया
जाता है, जो व्यावहारिक तौर पर चौथे घोण को सभी तरह से नवप्रभुता का
नेतृत्व करता है।

सेखा पाईपदा - प्रशिक्षण के तहत एक के लिए पथ

बुद्ध द्वारा निर्धारित मुख्य प्रथाओं के कदम से कदम परिभाषित करने वाले बारह सूत्र सफलतापूर्वक प्रगति करने के इच्छुक व्यक्ति के लिए यह मौलिक महत्व है,
क्योंकि इसमें निर्देश हैं जो एक कुशल अभ्यास के लिए अनिवार्य परिस्थितियों
को स्थापित करने के लिए ध्यानकर्ता को सक्षम करेगा।

अनपनानसति - सांस की जागरूकता
    
ब्रह्मा द्वारा सभी प्रकार के हितों के लिए आनापानसती की प्रथा का
अत्यधिक अनुशंसित है और यहां आप उसे दिए गए निर्देशों को ठीक से समझ सकते
हैं।
Anussati - पुनरावृत्ति
    
यहां हमारे पास बुद्ध (≈140 occ।), धम्म (≈ 90 गुणा) और संघ (≈45 गुणा) का मानक वर्णन है।
अप्पाड़ा सीटोवमुत्ति - मन की असीम मुक्तता
    
बुद्ध ने अक्सर चार अपमाना सेतोवोमुट्टियों के अभ्यास की प्रशंसा की है,
जो कि खतरों से संरक्षण लाने के लिए और ब्रह्मलोक की ओर अग्रसर होने के लिए
प्रतिष्ठित हैं।
अराहत - अर्रपंथशिप
    
यह स्टॉक फॉर्मूला है जिसके द्वारा अरहतह की प्राप्ति को सूत्तों में वर्णित किया गया है।
अरीया सिलखखंड - सदाचार के महान कुल
    
भिक्खों द्वारा पालन किए जाने वाले विभिन्न नियम
अरुपजजना - द फॉर्मलेस झांस
    
यहां चौथे घोड़ा से परे समाधि के अवशोषण का वर्णन करने वाले स्टॉक
फॉर्मूले हैं, जिन्हें अंततः पाली लिटरेचर में अरपजजान के रूप में संदर्भित
किया जाता है।
Āस्वतान ख्यान्ना - आसवों के विनाश का ज्ञान
    
आसावों के विनाश का ज्ञान: अरहांत्प
भोजने मैटनाकुटा - भोजन में मॉडरेशन
    
भोजन में संयम: खाने के लिए उचित मात्रा जानने के लिए
कत्तारो झना - चार झांसान
    
चार हिंदुओं: एक सुखद स्थायी होने
इंड्रीशू गुट्टावाराटा - अर्थ संकायों के द्वार पर निगरानी
    
अर्थ संकायों के द्वार पर गार्ड: अर्थ संयम
जागरिया अनूयोग - जागरूकता के प्रति समर्पण
    
जागरूकता का समर्पण: दिन और रात
Kammasskomhi - मैं अपने ही कम्मा हूँ
    
यह सूत्र बुद्ध की शिक्षा की नींव की नींव में विख्यात है: कारण और प्रभाव के कानून का एक व्यक्तिपरक संस्करण
निरूणणन पहाना - बाधाओं को दूर करना
    
बाधाओं को दूर करना: मानसिक राज्यों में बाधा डालने पर काबू पाने।
Pabbajjā - आगे जा रहा है
    
आगे बढ़ते हुए: दुनिया को त्यागने का निर्णय कैसे करता है?
पब्बिनिवसनसतीना - पूर्व जीवित स्थानों की याद करने का ज्ञान
    
पूर्व रहने वाले स्थानों की याद करने का ज्ञान: किसी के पिछले जीवन को याद रखना।
सतीपंधना - जागरूकता की उपस्थिति
    
ये सूत्र हैं जिनके द्वारा बुद्ध ने परिभाषित किया है कि चार सतीपहन क्या हैं (≈ 33 अवसर।)
सतिशगमना - माईंडफुलनेस और गहन समझ
    
मानसिकता और संपूर्ण समझ: एक निरंतर अभ्यास
सट्टा सद्मघा - सात अच्छे गुण हैं
    
सफल होने के लिए प्रशिक्षु द्वारा महारत हासिल करने के लिए सात मूलभूत गुण हैं इन गुणों में से चार गुण पांच आध्यात्मिक इन्द्रियों और पांच बालाओं में भी प्रकट होते हैं।
सत्तान कटूपापानना - दांतेदार प्राणियों के पुनर्जन्म का ज्ञान
    
डूसेज प्राणियों के पुनर्जन्म का ज्ञान।
सिलासम्त्ति - सद्गुण में उपलब्ध
    
सद्गुण में उपलब्ध: पाटीमोक्ष नियमों का सावधानीपूर्वक पालन।
विविटा सेनासेना भजन - एकांत घरों का सहारा लेना
    
एक उचित स्थान और उचित शारीरिक और मानसिक आसन को गोद लेने का विकल्प एक सफल प्रक्रिया की एक और साइन की गैर शर्त है।
बोधी पत्ती

http://www.buddha-vacana.org/patimokkha.html

Pātimokkha
- भिक्खु के दिशानिर्देश -

ये 227 दिशानिर्देश हैं जो हर भाखू को पाली भाषा में दिल से सीखना चाहिए ताकि वे उन्हें पढ़ सकें। यहां प्रत्येक दिशानिर्देश का अर्थपूर्ण विश्लेषण (उम्मीद है) प्रदान किया जाएगा।


पारगिका 1

    किसी भिक्खू को - भिक्खुओं के प्रशिक्षण और आजीविका में भाग लेना,
प्रशिक्षण को छोड़ने के बिना, अपनी कमजोरी घोषित किए बिना - संभोग में
संलग्न होना, यहां तक ​​कि एक महिला पशु के साथ भी, वह पराजित हो गया है और
अब संबद्धता में नहीं है।

http://www.buddha-vacana.org/patimokkha/par1.html

    पारगिका 1

यो पाना भिक्खु भाखुना साख़ा · सिविजी · समपन्नो सिक्खा अ · नकक़ाा · डु ·
बी · बाल्याव ऐनावी · कटवा मीथून धम्म पाप्याय ईतामो तीरचचन · गटाया ·
पाई, पार्जिको होटी अ · सावर्स्वर।

किसी भिक्खू को - भिक्खुओं के प्रशिक्षण और आजीविका में भाग लेना,
प्रशिक्षण को छोड़ने के बिना, अपनी कमजोरी घोषित किए बिना - संभोग में
संलग्न होना, यहां तक ​​कि एक महिला पशु के साथ भी, वह पराजित हो गया है और
अब संबद्धता में नहीं है।

यो पान भूकु को किसी भी भिक्खु को चाहिए
भिक्खुण सिखशा · साजिजी · समपन्नो ने भिक्खों के प्रशिक्षण और आजीविका में भाग लिया,
प्रशिक्षण छोड़ने के बिना सिक्खा अक्किकेखा,
डुबली · बाल्याव · एवी · कटवा अपनी कमजोरी घोषित किए बिना
मैथून धम्मा पासीसेया यौन संबंध में संलग्न होती है,
अंतमाशो तीरचचन · गटाया · पाई, यहां तक ​​कि एक महिला जानवर के साथ,
पाराजाइको होट्री अष्टवों वह पराजित हो गया है और अब संबद्धता में नहीं है

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आसान पहुँच:

दीघा निकारा

मेजहिमा निकारा

सैटुटा निकारा

अंगुरा निकारा

http://www.buddha-vacana.org/sutta/digha.html
पेड़
दीघा निकारा
- लंबे वादे -
[दीघा: लंबा]

दीघा निकारा माना जाता है कि बुद्ध द्वारा दिए गए सबसे लंबे समय के 34 वार्ताएं इकट्ठा करते हैं।

पोपपाद सुत्ता (डीएन 9) {उद्धरण} - बढ़ाया अनुवाद
    
पोपाधडा ने संन की प्रकृति को पुनः प्राप्त करने वाले विभिन्न प्रश्न पूछे।
महापरिनिबना सुत्ता (डी एन 16) {अंश} - शब्द से शब्द
    
यह सूत अपने निधन के बाद अपने अनुयायियों के लिए बुद्ध ने दिए गए विभिन्न
निर्देशों को इकट्ठा करते हैं, जो आजकल हमारे लिए निर्देशों का एक बहुत ही
महत्वपूर्ण समूह है।
महासातिपंधान सुत्त (डीएन 22) - शब्द के अनुसार शब्द
    
इस सूता को व्यापक रूप से ध्यान अभ्यास के लिए एक मूल संदर्भ के रूप में माना जाता है।

—— oooOooo ——

http://www.buddha-vacana.org/sutta/majjhima.html
मेजहिमा निकारा
- मध्यम लंबाई के प्रवचन -
[मज्जिमः मध्यम]

मर्जिमा निकारा विभिन्न मामलों से निपटने के मध्यवर्ती लंबाई के बुद्ध के 152 प्रवचन इकट्ठा करते हैं।

सब्बासव सुत्त (एमएन 2) - उन्नत अनुवाद
    
बहुत दिलचस्प सूत्त, जहां अलग-अलग तरीकों से आसवें, मन की अपरिष्कृत विकारों को दूर किया जाता है।
Bhayabherava सुत्त (एमएन 4) - बढ़ाया अनुवाद
    
जंगल में एकांत में रहने के लिए क्या होगा, पूरी तरह से डर से मुक्त? बुद्ध बताते हैं कि
वठ्ठा सुत्त (एमएन 7) {अंश} - उन्नत अनुवाद
    
हम यहां मन की सोलह अशुद्धियों (अपकक्लिसा) की एक मानक सूची और एक तंत्र
का स्पष्टीकरण पाते हैं जिसके माध्यम से एक बुद्ध, धम्म और संघ में इन
पुष्टि की पुष्टि हो जाती है, जो धारा-प्रवेश के कारक हैं।
महादुखखखण्ड सुत्त (एमएन 13) - उन्नत अनुवाद
    
आसा (आकर्षण) पर, आदी (दोष) और काम (कामुकता), रुप्पा (वेदना) और वेदना (भावना) के निसार (मुक्ति)। विचार करने के लिए बहुत उपयोगी बात है।
कूहतस्थिपदोपमा सुत्ता (एमएन 27) - अनुवाद में वृद्धि
    
बुद्ध बताते हैं कि वास्तव में वह कैसे प्रबुद्ध है, विश्वास या किसी
अनुमान के रूप में अनुमानित रूप से लिया जाना चाहिए, जब तक कि एक निश्चित
अवस्था तक नहीं पहुंच पाई और इस तरह के ज्ञान के बिना ऐसे ज्ञान का कोई
दावा बेकार हो।
महावदवाल सुत्ता (एमएन 43) {उद्धरण} - शब्द द्वारा शब्द
    
सैर्यपुता ने एजसमा महाकोहिका द्वारा पूछे गए विभिन्न दिलचस्प सवालों का
उत्तर दिया है, और इस अंश में, वे बताते हैं कि वेदाना, सनना और विणांता
स्पष्ट रूप से चित्रित नहीं हैं, लेकिन गहराई से अंतर होता है।
कूवेवतल्ला सुत्ता (एमएन 44) {अंश} - अनुवाद में वृद्धि
    
भक्तुनी धामधिन ने विशाखा द्वारा पूछे जाने वाले कई दिलचस्प सवालों का जवाब दिया। अन्य बातों के अलावा, वह सक्ष्याधीय की 20 गुणा परिभाषा देती है
सेखा सुत्त (एमएन 53) - बढ़ाया अनुवाद
    
बुद्ध ने पंढिपदा को व्यक्त करने के लिए Āण्डा को पूछता है, जिसमें से वह
एक आश्चर्यजनक संस्करण देता है, जिसमें से सत्यम्पाजाण और निवराणन स्थल की
बारीकी से सात ‘अच्छे गुणों’ की श्रृंखला की जगह होती है, और जो एक
कहानियों का वर्णन करती है।
पोतालीया सुत्त (एमएन 54) - बढ़ाया अनुवाद
    
विवेक में देने की कमियों और खतरों की व्याख्या करने के लिए सात मानक सिमली की एक श्रृंखला।
बहुउद्देशीय सुत्त (एमएन 59) {उद्धरण} - शब्द से शब्द
    
इस छोटे से अंश में, बुद्ध ने पांच कामागुणों को परिभाषित किया है और एक अन्य प्रकार की खुशी के साथ महत्वपूर्ण तुलना की है।
किगागी सुत्ता (एमएन 70) {अंश} - उन्नत अनुवाद
    
इस सूत्ता में धम्मअनुसारी और सद्नौसारी की परिभाषा है
बाहिती सुत्ता (एमएन 88) {उद्धरण} - उन्नत अनुवाद
    
कोसाला के राजा Pasenadi समझने के लिए उत्सुक है कि क्या सिफारिश की है
या नहीं द्वारा बुद्धिमान भिक्षुओं और ब्राह्मणों द्वारा, और वह प्रश्नों
के प्रश्न पूछता है, जो हमें कुसाला (पौष्टिक) और अकुशल (अनावश्यक) शब्दों
के अर्थ की बेहतर समझ की अनुमति देता है।
अनंतनाशती सुत्त (एमएन 118) - शब्द से शब्द
    
नानापनासती के अभ्यास के बारे में प्रसिद्ध सूत्ता, और यह कैसे चार
सतीपनाओं के अभ्यास की ओर जाता है और पूरी तरह से सात बुजुघगाह की पूर्ति
के लिए।
संतातनविभागा सुत्त (एमएन 137) {अंश} - उन्नत अनुवाद
    
इस गहरी और बहुत ही दिलचस्प सूत में, बुद्ध ने अन्य चीजों के बीच
परिभाषित किया है जो सुखद, अप्रिय और तटस्थ मानसिक भावनाओं की जांच कर रहे
हैं, और बुद्ध के मानक वर्णन में पाए गए अभिव्यक्ति को भी परिभाषित करता
है: ‘अन्ततरो पुरीसदममात्रि’
इंद्रजीवन सूत्ता (एमएन 152) - शब्द के अनुसार शब्द
    
इस सूत्ता अर्थ संयम के अभ्यास के तीन तरीकों की पेशकश करती है, जिसमें
इंद्रीसु गुट्टाद्वारा फ़ार्मुलों के पूरक अतिरिक्त निर्देश होते हैं।

—— oooOooo ——


http://www.buddha-vacana.org/sutta/samyutta.html

पेड़
सैटुटा निकारा
वर्गीकृत प्रवचन -
[साउतत्ता: समूह]

सैयद निकारा के प्रवचन को उनके विषय के अनुसार 56 साउत में विभाजित किया गया है, जो स्वयं को पांच योनिगास में बांटा गया है।

विभेद सुत्त (एसएन 12.2) - शब्द के द्वारा शब्द
    
बारह लिंक में से प्रत्येक की परिभाषा के साथ, पिक्सी संप्रपादन का विस्तृत विवरण।
Cetanā Sutta (एस एन 12.38) - बढ़ाया अनुवाद
    
यहां बुद्ध बताते हैं कि कैसे सांता, एक साथ विचार और अनूस्या के साथ, विणुण के आधार के रूप में कार्य करें।
उपदान सुत्त (एसएन 12.52) - उन्नत अनुवाद
    
यह एक बहुत ही रहस्यमय सबक है जो बताता है कि मनोवैज्ञानिक तंत्र से
तरसता में क्या होता है, और यह बताता है कि इसे से छुटकारा पाने के लिए इसे
आसानी से कैसे बदला जा सकता है।
पुट्टमासुस्पामा सुत्त (एसएन 12.63) - उन्नत अनुवाद
    
चार्हारों को कैसे समझा जाना चाहिए, यह बताने के लिए बुद्ध चार प्रभावशाली और स्फूर्तिदायक सिलीम्स प्रदान करता है।
सानिदना सुत्त (एस एन 14.12) - बढ़ाया अनुवाद
    
कैसे अद्भुतता कार्यों में बदल जाती है की एक अद्भुत व्याख्या, आगे प्रज्वलन मशाल के simile द्वारा प्रबुद्ध अप्रिय विचारों को दूर करने के लिए सावधानी से रहें!
Āṇi सुत्त (एस एन 20.7) - शब्द के द्वारा शब्द
    
बुद्ध
ने हमें एक बहुत ही महत्वपूर्ण चीज को याद दिलाया है: हमारे स्वयं के लाभ
के लिए और साथ ही साथ पीढ़ी पीढ़ी के लिए आने के लिए, हमें अपने वास्तविक
शब्दों को सबसे अधिक महत्व देना चाहिए, और ऐसा नहीं है कि जो भी आजकल
दिखावा करता है या
अतीत में एक उचित (धम्म) शिक्षक होने का नाटक किया है
समाज सूत्त (एसएन 22.5) - शब्द के अनुसार शब्द
    
बुद्ध अपने अनुयायियों को एकाग्रता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करते
हैं ताकि वे पांच समुच्चयों के उत्पन्न होने और मृत्यु के बारे में
अंतर्दृष्टि का पालन कर सकें, जिसके बाद वह परिभाषित करता है कि आश्रित
उत्पत्ति के संदर्भ में उत्पन्न होने वाले और समुच्चय को समाप्त करने के
द्वारा उनका क्या अर्थ है।
पिसिल्ला सूत्ता (एसएन 22.6) - अनुवाद के बिना
    
बुद्ध अपने अनुयायियों को अलग-अलग अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करते
हैं ताकि वे पांच समुच्चयों के उत्पन्न और गहराई में अंतर्दृष्टि का पालन
कर सकें, जिसके बाद वह परिभाषित करता है कि वह आश्रित उत्पत्ति के संदर्भ
में उत्पन्न होने और मृत्यु को समाप्त करने के द्वारा इसका क्या मतलब है।
उपपादिपतिसाना सुत्त (एसएन 22.8) - शब्द के द्वारा शब्द
    
पांच समुच्चय में होने वाली पीड़ा का उद्भव और समापन
नंदिकखा सूत्त (एसएन 22.51) - शब्द से शब्द
    
खुशी का विनाश कैसे संचालित करें
अनुतलक्षन सुत्त (एसएन 22.59) - शब्द के अनुसार शब्द
    
इस बहुत प्रसिद्ध सूत में, बुद्ध ने पहली बार अन्त पर अपनी पढ़ाई की व्याख्या की।
खजज्यानु सुत्त (एसएन 22.79) {उद्धरण} - शब्द से शब्द
    
यह सूत पांच खाधों की एक संक्षिप्त परिभाषा प्रदान करता है।
सुधिका सुत्त (एसएन 29.1) - अनुवादित अनुवाद
    
विभिन्न प्रकार के नागास
सुधिका सुत्त (एसएन 30.1) - उन्नत अनुवाद
    
विभिन्न प्रकार के सुधा (उर्फ गरुदास)।
सुधिका सुत्त (एसएन 31.1) - एन्हांस्ड ट्रांसलेशन
    
विभिन्न प्रकार के गांधी देवता
सुधिका सुत्त (एस एन 32.1) - उन्नत अनुवाद
    
विभिन्न प्रकार के बादल देवता
सामपट्टिमोलक्षिधि सुत्त (एस एन 34.11) - अनुवाद में वृद्धि
    
एकाग्रता बनाए रखना बनाइए एकाग्रता बनाए रखना।
पब्ब्सम्बोदा सूत्त (एस एन 35.13) - शब्द के अनुसार शब्द
    
बुद्ध परिभाषित करता है कि आंतरिक अर्थों के मामले में उन्हें लुभाना,
दोष और मुक्ति के द्वारा क्या मतलब है, और फिर घोषित करता है कि उनकी जागरण
उन्हें अधिक समझने से और कुछ भी नहीं थी।
अभिनन्दन सूत्त (एसएन 35.20) - शब्द के द्वारा शब्द
    
जो भी ज्ञान वस्तुओं में प्रसन्न है, उसके लिए कोई बच नहीं है
मिजाजला सुत्त (एस एन 35.46) - अनुवाद में वृद्धि
    
सच्ची एकांत को खोजने के लिए इतना मुश्किल क्यों है? बुद्ध बताते हैं, कोई बात नहीं तुम कहां जाते हो, आपका सबसे परेशान साथी हमेशा साथ टैग करते हैं।
Avijjāpahāna Sutta (एस एन 35.53) - शब्द से शब्द
    
एक बहुत ही सरल प्रवचन, अभी तक v
Sabbupadanapariñña Sutta (एस एन 35.60) - शब्द के द्वारा शब्द
    
बुद्ध, सभी लगाव की पूरी समझ का विस्तार करते हुए, एक गहरी और अभी तक
बहुत स्पष्ट व्याख्या देता है: तीन घटनाओं के आधार पर संपर्क उत्पन्न होता
है।
मिजाजला सूत्ता सूत्त (एसएन 35.64) {उद्धरण} - शब्द से शब्द
    
कुछ
neophytes (और हम अक्सर उन्हें अपने बीच में गिन सकते हैं) कभी-कभी
विश्वास करना चाहते हैं कि संवेदनाओं को जन्म देने और न ही पीड़ित होने के
बावजूद कामुक सुखों में प्रसन्न होना संभव है।
बुद्ध मिगजला को सिखाता है कि यह सर्वथा असंभव है
Adantagutta Sutta (एस एन 35.94) - शब्द के द्वारा शब्द
    
यहां
उन सलाहकारों में से एक है जो बुद्धि के साथ समझने में इतनी आसान है,
लेकिन गहरे स्तर पर समझना इतना कठिन है क्योंकि हमारे गलत विचारों में इस
प्रक्रिया में लगातार हस्तक्षेप होता है।
इसलिए हमें इसे बार-बार पुनरावृत्ति करने की आवश्यकता है, भले ही यह कुछ को उबाऊ लग सकता है
पमादविहिरी सूत्त (एसएन 35.97) - शब्द के अनुसार शब्द
    
जो लापरवाही के साथ रहता है और जो सतर्कता के साथ रहता है, उसके बीच अंतर क्या है।
सक्खाणा सुत्ता सुत्त (एसएन 35.118) - शब्द से शब्द
    
बुद्ध ने सक्का के सवाल का एक सरल जवाब दिया: क्या कारण है कि कुछ लोग अंतिम लक्ष्य प्राप्त करते हैं जबकि अन्य नहीं करते?
स्वरुप सुत्त (एस एन 35.137) - शब्द के अनुसार शब्द
    
बुद्ध एक बार फिर हमारे लिए बताते हैं, एक अन्य तरीके से, कारण और दुख की समाप्ति। यह सही है कि हम सभी दिन और सारी रात को क्या करते रहते हैं।
अनीकैनिबनासप्पुआ सूत्त (एस एन 35.147) - शब्द से शब्द
    
यहां कट्टर विपश्यना निर्देश हैं जो उन्नत मनोदकों के लिए अस्थिरता की
धारणा के साथ काम कर रहे हैं, जो निबाना प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं।
अजजतट्टट्टू सुत्त (एस एन 35.142) - शब्द से शब्द
    
अर्थ अंगों के उत्पन्न होने के कारणों की जांच करने के लिए, जिनके बारे
में समझना आसान नहीं हो सकता है, इस मामले को उनके मामले में हस्तांतरित
करने की अनुमति देता है।
समद्द्व सूत्त (एसएन 35.229) - उन्नत अनुवाद
    
महान लोगों के अनुशासन में क्या समुद्र है? उस में डूबने के लिए सावधान!
पहाड़ सुत्त (एस एन 36.3) - उन्नत अनुवाद
    
तीन प्रकार के वेदाना और तीन अनसुय के बीच संबंध।
Dahhba Sutta (SN 36.5) - बढ़ाया अनुवाद
    
कैसे तीन प्रकार के वेदना (भावनाओं) को देखा जाना चाहिए।
सल्ला सुता (एस एन 36.6) - अनुवाद में वृद्धि
    
जब
शारीरिक दर्द के तीर से गोली मार दी जाती है, तो एक बुद्धिमान व्यक्ति
इसके ऊपर मानसिक पीड़ा को बिगाड़ता है, जैसे कि उसे दो तीर से गोली मार दी
गई है।
एक बुद्धिमान व्यक्ति अकेले एक तीर का डंक महसूस करता है।
अनीका सुट्टा (एस एन 36.9) - बढ़ाया अनुवाद
    
वेदना (भावनाओं) की सात विशेषताओं, जो अन्य चार खांधों पर भी लागू होती
हैं (एसएन 22.21) और पाइकाका समूपपाद (एसएन 12.20) के बारह लिंक में से
प्रत्येक।
Phasamūlaka Sutta (एस एन 36.10) - शब्द से शब्द
    
तीन प्रकार की भावनाएं तीन प्रकार के संपर्कों में निहित हैं।
अहहास सुत्त (एसएन 36.22) - अनुवाद में वृद्धि
    
बुद्ध ने वेदनाओं को सात अलग-अलग तरीकों से देखा, उनका विश्लेषण दो, तीन,
पांच, छः, अठारह, तीस या छह या एक सौ और आठ श्रेणियों में किया।
निरमिसा सुत्त (एसएन 36.31) {उद्धरण} - शब्द से शब्द
    
हम यहां समझ सकते हैं कि पित्ती, हालांकि अक्सर बुजजाग के रूप में सूचीबद्ध किया जाता है, कभी-कभी अकसूला भी हो सकता है इस मार्ग में पांच कागमगुणा की परिभाषा भी शामिल है।
धम्मवादीडीश सुत्ता (एस एन 38.3) - अनुवाद में वृद्धि
    
दुनिया में धम्म को किसने समर्पित किया (धम्म वादी)? कौन अच्छा अभ्यास करता है (सुप्रसिद्ध पापीना)? कौन अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है (सूट)?
दक्कारा सूत्त (एसएन 39.16) - एन्हांस्ड ट्रांसलेशन
    
इस शिक्षण और अनुशासन में क्या करना मुश्किल है?
विभेद सुत्त (एस एन 45.8) - शब्द के द्वारा शब्द
    
यहां बुद्ध ने आठ गुना महान पथ के प्रत्येक कारक को ठीक से परिभाषित किया है।
Āgantuka सुत्त (एस एन 45.159) - बढ़ाया अनुवाद
    
कैसे विभिन्न प्रकार के आगंतुकों का स्वागत करते हुए मेहमान घर के रूप
में विभिन्न धम्मों से जुड़े अभिशन के साथ नोबल पथ काम करता है।
कुसल सुत्त (एसएन 46.32) - शब्द के द्वारा शब्द
    
एक बात में लाभप्रद एकजुट होते हैं
Āhā Sutta (एस एन 46.51) - बढ़ाया अनुवाद
    
बुद्ध बताते हैं कि कैसे हम अपने ध्यान को कैसे लागू करते हैं, इसके
अनुसार हम या तो “फ़ीड” या “ज्ञानहीनता के कारक” और बाधाओं को “भूखा” कैसे
कर सकते हैं।
सामरावा सूत्त (एसएन 46.55) {अंश} - अनुवाद में वृद्धि
    
यह समझाने के लिए कि कैसे पांच नीवारा (बाधाएं) मन की पवित्रता को
प्रभावित करती है और वास्तविकता को समझने की अपनी क्षमता के रूप में यह है,
सिमुली की एक सुंदर श्रृंखला।
सती सुत्त (एस एन 47.35) - शब्द से शब्द
    
इस सूत में, बुद्ध ने भक्तों को सतीस और सांपाजानो होने की याद दिलाया, और फिर इन दो शब्दों को परिभाषित करता है
विभेद Sutta (एस एन 47.40) - शब्द के द्वारा शब्द
    
सप्तपंथियों ने संक्षेप में पढ़ाया

1 comment
2583 Fri 6th Apr 2018 LESSON
Filed under: General, Vinaya Pitaka, Sutta Pitaka, Tipiṭaka, ವಿನಯಪಿಟಕ, ತಿಪಿಟಕ (ಮೂಲ)
Posted by: @ 1:19 am


Dahhba Sutta (एस एन 48.8) - बढ़ाया अनुवाद
    
माना जाता है कि पांच आध्यात्मिक दुश्मनों में से प्रत्येक को चार गुना धम्म में देखा जाता है।
साख्त्ता सुत्ता (एसएन 48.14) - एन्हांस्ड ट्रांसलेशन
    
उन्हें पूरा करना ही हमें करना है, और यह हमारी मुक्ति का उपाय है
विभेद सुत्त (एसएन 48.38) - उन्नत अनुवाद
    
यहां बुद्ध पांच संवेदनशील Indriyas परिभाषित करता है
Sabbupadanapariñña Sutta (एस एन 35.60) - शब्द के द्वारा शब्द
    
बुद्ध, सभी लगाव की पूरी समझ का विस्तार करते हुए, एक गहरी और अभी तक
बहुत स्पष्ट व्याख्या देता है: तीन घटनाओं के आधार पर संपर्क उत्पन्न होता
है।
मिजाजला सूत्ता सूत्त (एसएन 35.64) {उद्धरण} - शब्द से शब्द
    
कुछ
neophytes (और हम अक्सर उन्हें अपने बीच में गिन सकते हैं) कभी-कभी
विश्वास करना चाहते हैं कि संवेदनाओं को जन्म देने और न ही पीड़ित होने के
बावजूद कामुक सुखों में प्रसन्न होना संभव है।
बुद्ध मिगजला को सिखाता है कि यह सर्वथा असंभव है
Adantagutta Sutta (एस एन 35.94) - शब्द के द्वारा शब्द
    
यहां
उन सलाहकारों में से एक है जो बुद्धि के साथ समझने में इतनी आसान है,
लेकिन गहरे स्तर पर समझना इतना कठिन है क्योंकि हमारे गलत विचारों में इस
प्रक्रिया में लगातार हस्तक्षेप होता है।
इसलिए हमें इसे बार-बार पुनरावृत्ति करने की आवश्यकता है, भले ही यह कुछ को उबाऊ लग सकता है
पमादविहिरी सूत्त (एसएन 35.97) - शब्द के अनुसार शब्द
    
जो लापरवाही के साथ रहता है और जो सतर्कता के साथ रहता है, उसके बीच अंतर क्या है।
सक्खाणा सुत्ता सुत्त (एसएन 35.118) - शब्द से शब्द
    
बुद्ध ने सक्का के सवाल का एक सरल जवाब दिया: क्या कारण है कि कुछ लोग अंतिम लक्ष्य प्राप्त करते हैं जबकि अन्य नहीं करते?
स्वरुप सुत्त (एस एन 35.137) - शब्द के अनुसार शब्द
    
बुद्ध एक बार फिर हमारे लिए बताते हैं, एक अन्य तरीके से, कारण और दुख की समाप्ति। यह सही है कि हम सभी दिन और सारी रात को क्या करते रहते हैं।
अनीकैनिबनासप्पुआ सूत्त (एस एन 35.147) - शब्द से शब्द
    
यहां कट्टर विपश्यना निर्देश हैं जो उन्नत मनोदकों के लिए अस्थिरता की
धारणा के साथ काम कर रहे हैं, जो निबाना प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं।
अजजतट्टट्टू सुत्त (एस एन 35.142) - शब्द से शब्द
    
अर्थ अंगों के उत्पन्न होने के कारणों की जांच करने के लिए, जिनके बारे
में समझना आसान नहीं हो सकता है, इस मामले को उनके मामले में हस्तांतरित
करने की अनुमति देता है।
समद्द्व सूत्त (एसएन 35.229) - उन्नत अनुवाद
    
महान लोगों के अनुशासन में क्या समुद्र है? उस में डूबने के लिए सावधान!
पहाड़ सुत्त (एस एन 36.3) - उन्नत अनुवाद
    
तीन प्रकार के वेदाना और तीन अनसुय के बीच संबंध।
Dahhba Sutta (SN 36.5) - बढ़ाया अनुवाद
    
कैसे तीन प्रकार के वेदना (भावनाओं) को देखा जाना चाहिए।
सल्ला सुता (एस एन 36.6) - अनुवाद में वृद्धि
    
जब
शारीरिक दर्द के तीर से गोली मार दी जाती है, तो एक बुद्धिमान व्यक्ति
इसके ऊपर मानसिक पीड़ा को बिगाड़ता है, जैसे कि उसे दो तीर से गोली मार दी
गई है।
एक बुद्धिमान व्यक्ति अकेले एक तीर का डंक महसूस करता है।
अनीका सुट्टा (एस एन 36.9) - बढ़ाया अनुवाद
    
वेदना (भावनाओं) की सात विशेषताओं, जो अन्य चार खांधों पर भी लागू होती
हैं (एसएन 22.21) और पाइकाका समूपपाद (एसएन 12.20) के बारह लिंक में से
प्रत्येक।
Phasamūlaka Sutta (एस एन 36.10) - शब्द से शब्द
    
तीन प्रकार की भावनाएं तीन प्रकार के संपर्कों में निहित हैं।
अहहास सुत्त (एसएन 36.22) - अनुवाद में वृद्धि
    
बुद्ध ने वेदनाओं को सात अलग-अलग तरीकों से देखा, उनका विश्लेषण दो, तीन,
पांच, छः, अठारह, तीस या छह या एक सौ और आठ श्रेणियों में किया।
निरमिसा सुत्त (एसएन 36.31) {उद्धरण} - शब्द से शब्द
    
हम यहां समझ सकते हैं कि पित्ती, हालांकि अक्सर बुजजाग के रूप में सूचीबद्ध किया जाता है, कभी-कभी अकसूला भी हो सकता है इस मार्ग में पांच कागमगुणा की परिभाषा भी शामिल है।
धम्मवादीडीश सुत्ता (एस एन 38.3) - अनुवाद में वृद्धि
    
दुनिया में धम्म को किसने समर्पित किया (धम्म वादी)? कौन अच्छा अभ्यास करता है (सुप्रसिद्ध पापीना)? कौन अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है (सूट)?
दक्कारा सूत्त (एसएन 39.16) - एन्हांस्ड ट्रांसलेशन
    
इस शिक्षण और अनुशासन में क्या करना मुश्किल है?
विभेद सुत्त (एस एन 45.8) - शब्द के द्वारा शब्द
    
यहां बुद्ध ने आठ गुना महान पथ के प्रत्येक कारक को ठीक से परिभाषित किया है।
Āgantuka सुत्त (एस एन 45.159) - बढ़ाया अनुवाद
    
कैसे विभिन्न प्रकार के आगंतुकों का स्वागत करते हुए मेहमान घर के रूप
में विभिन्न धम्मों से जुड़े अभिशन के साथ नोबल पथ काम करता है।
कुसल सुत्त (एसएन 46.32) - शब्द के द्वारा शब्द
    
एक बात में लाभप्रद एकजुट होते हैं
Āhā Sutta (एस एन 46.51) - बढ़ाया अनुवाद
    
बुद्ध बताते हैं कि कैसे हम अपने ध्यान को कैसे लागू करते हैं, इसके
अनुसार हम या तो “फ़ीड” या “ज्ञानहीनता के कारक” और बाधाओं को “भूखा” कैसे
कर सकते हैं।
सामरावा सूत्त (एसएन 46.55) {अंश} - अनुवाद में वृद्धि
    
यह समझाने के लिए कि कैसे पांच नीवारा (बाधाएं) मन की पवित्रता को
प्रभावित करती है और वास्तविकता को समझने की अपनी क्षमता के रूप में यह है,
सिमुली की एक सुंदर श्रृंखला।
सती सुत्त (एस एन 47.35) - शब्द से शब्द
    
इस सूत में, बुद्ध ने भक्तों को सतीस और सांपाजानो होने की याद दिलाया, और फिर इन दो शब्दों को परिभाषित करता है
विभेद Sutta (एस एन 47.40) - शब्द के द्वारा शब्द
    
सप्तपंथियों ने संक्षेप में पढ़ाया
Dahhba Sutta (एस एन 48.8) - बढ़ाया अनुवाद
    
माना जाता है कि पांच आध्यात्मिक दुश्मनों में से प्रत्येक को चार गुना धम्म में देखा जाता है।
साख्त्ता सुत्ता (एसएन 48.14) - एन्हांस्ड ट्रांसलेशन
    
उन्हें पूरा करना ही हमें करना है, और यह हमारी मुक्ति का उपाय है
विभेद सुत्त (एसएन 48.38) - उन्नत अनुवाद
    
यहां बुद्ध पांच संवेदनशील Indriyas परिभाषित करता है
एडांगा वाघ्गा (एएन 1.31-40) - बढ़ाया अनुवाद
    
मन हमारा सबसे बुरा दुश्मन या हमारा सबसे अच्छा दोस्त हो सकता है
उदकराकाक सूतेस (एएन 1.45 और 46) - वर्धित अनुवाद
    
एक स्पष्ट दिमाग और एक गंदी एक के बीच अंतर।
मुडू सुत्त (एएन 1.47) - बढ़ाया अनुवाद
    
एक मस्तिष्क के लिए एक साजिश है जो मज़बूत है
Lahuparivatta सुत्त (एएन 1.48) - बढ़ाया अनुवाद
    
बुद्ध, सिमुली खोजने में सामान्य रूप से बहुत माहिर हैं, यहां एक नुकसान में है।
अचरासाघट पय्याला (एएन 1.53-55) - शब्द से शब्द
    
सद्भावना का अभ्यास करना उपहार के योग्य बनाता है
कुशल सूतेस (एएन 1.56-73) - शब्द के द्वारा शब्द
    
क्या उत्पादन और क्या पौष्टिक और हानिकारक मानसिक राज्यों को समाप्त।
पमाड़ा सूतेस (एएन 1.58-59) - अनुवादित अनुवाद
    
इस तरह कुछ भी इतना हानिकारक नहीं है
पमादानी वाग्गा (एएन 1.81-9 7) - शब्द से शब्द
    
बुद्ध फिर से हमें बेखबरता से चेतावनी देते हैं।
कायागतासती वाजगा (एएन 1.563-574) {अंश) - उन्नत अनुवाद
    
बुद्ध शरीर को निर्देशित दिमाग की उच्च प्रशंसा में बोलते हैं।

—— oooOooo ——


2. दुक निपाता

अप्छिवान्त सुत्त (एएन 2.5) - अनुवादित अनुवाद
    
अगर हम जागरूकता तक पहुंचने की इच्छा रखते हैं तो हमें खुद को प्रशिक्षित करना चाहिए।
क्रियािया सुत्त (एएन 2.9) - बढ़ाया अनुवाद
    
यह सब क्या है, जो किसी एक समाज के भीतर एक शब्द शांति में सद्भाव, विनम्रता, ईमानदारी, भाईचारे की गारंटी देता है? बुद्ध यहाँ बताते हैं कि दुनिया के दो संरक्षक कौन हैं।
इक्कासेन सुत्त (ए.एन. 2.18) - अनुवादित अनुवाद
    
यहां एक बात है जो बुद्ध स्पष्ट रूप से घोषित करते हैं
विजजावटी सुत्त (एएन 2.32) - शब्द के अनुसार शब्द
    
यहां बुद्ध ने समता को रागा और सेतोविमूर्ति के साथ संबोधित किया है, और विजासाना के साथ अवजा और पनिविमूर्ति।

—— oooOooo ——

3. तिका निपाता

केसममुटी [उर्फ कालाममा] सुत्त (एएन 3.66) - शब्द से शब्द
    
इस प्रसिद्ध सूत में, बुद्ध हमें याद दिलाता है कि अंततः वास्तविकता का
अपना प्रत्यक्ष अनुभव, अन्य लोगों द्वारा जो घोषित किया गया है, भले ही वे
हमारे ‘श्रद्धेय शिक्षक’ होने के बावजूद भरोसा नहीं करते हैं।
साहा सूत्त (एएन 3.67) - अनुवादित अनुवाद
    
यहां दी गई सलाह कलमा को दी गई बहुत ही समान है।
अनीतितिथिया सुत्त (एएन 3.6 9) - अनुवादित अनुवाद
    
हानिकारक की तीन जड़ों को उनके सम्मान की विशेषता के साथ समझाया गया है,
उनके उत्पन्न होने का कारण, और उनकी समाप्ति के बारे में लाने का तरीका।
उपोसाथ सुत्त (एएन 3.71) - अनुवादित अनुवाद
    
इस सूत में, बुद्ध ने परिभाषित किया है कि लोगों को उपोसाथ का अभ्यास करना चाहिए और विभिन्न प्रकार के देवताओं का वर्णन करना चाहिए।
सिलाब्बात्ता सुत्त (एएन 3.79) - अनुवादित अनुवाद
    
आनन्द बताते हैं जिसके द्वारा बहुत सरल क्रिएरीया संस्कार और अनुष्ठानों को लाभकारी या नहीं माना जा सकता है।
समता सुत्त (एएन 3.82) - उन्नत अनुवाद
    
यहां तपस्या के तीन तपस्या कार्य हैं।
वजजिपुत्ता सुत्त (एएन 3.85) - अनुवादित अनुवाद
    
एक निश्चित भिक्षु इतने सारे नियमों के साथ ट्रेन नहीं कर सकता है। बुद्ध बताते हैं कि उनके बिना वह कैसे कर सकता है, और यह अच्छी तरह से काम करता है।
सिक्खट्टा सूत्त (एएन 3.90) - शब्द से शब्द
    
बुद्ध ने तीन प्रशिक्षणों को परिभाषित किया है, अर्थात् ऐश्शीलासिखा, आदितिकताखेखा और आधिपुननासिखा।
Accaika Sutta (एएन 3.93) - बढ़ाया अनुवाद
    
एक तपस्या के तीन जरूरी कार्य जो एक किसान के तीन जरूरी कामों के समान हैं।
सिक्खट्टा सूत्ता (एएन 3.91) - शब्द के अनुसार शब्द
    
यहां बुद्ध ने एक आधिकारिक परिभाषा दी है।
पौधसूव्वाक सुत्त (एएन 3.102) - कुछ जानकारी · बुलबुले
    
इस सूत में, बुद्ध ने एक सोनार के काम के अभ्यास के माध्यम से मानसिक अशुद्धियों को हटाने की तुलना की। यह विशेष रूप से रोचक है, क्योंकि यह अभ्यास के दौरान किसी भी तरह की
अशुद्धता का एक क्रमिक प्रदर्शन प्रदान करता है, जो एक उपयोगी संदर्भ देता
है।
निमीता सुत्त (एएन 3.103) - कुछ जानकारी · बुलबुले
    
क्या आप अपने ध्यान अभ्यास के दौरान अपने आप को हिदायत कर रहे हैं या अत्यधिक उत्तेजित हो? संयमियों
के लिए यह एक बहुत ही उपयोगी प्रवचन है, जो समसामयिकता के साथ मिलकर
प्रयास और एकाग्रता के दो इसी आध्यात्मिक संकायों को संतुलित करना चाहते
हैं।
हम में से बहुत से इन निर्देशों को ठीक से लागू करने से काफी लाभ होगा
रुत्ता सुत्त (एएन 3.108) - शब्द के द्वारा शब्द
    
यहां बुद्ध बताते हैं कि महान लोगों के अनुशासन में गायन और नाचते हैं, और फिर हंसने और मुस्कुराहट के बारे में निर्देश देते हैं।
अतीती सुत्त (एएन 3.10 9) - बढ़ाया अनुवाद
    
तीन गलत बातें, जिनमें से कई दुर्भाग्य से शौकीन हैं, जो तृप्ति के बारे में कभी नहीं ला सकते हैं
निदान सुत्त (ए एन 3.112) - वर्धित अनुवाद
    
छह कारण, तीन पौष्टिक और तीन हानिकारक, कम्माल उत्पन्न होने के कारण
Kammapatha Sutta (ए एन 3.164) - शब्द से शब्द
    
यह यहाँ दिखाया गया है कि इस विचार के अनुसार गैर-शाकाहारी होने में कुछ भी गलत नहीं है, यह गलत है।

—— oooOooo ——
4. कट्टुका निपाता

योग सूत्त (एएन 4.10) - अनुवादित अनुवाद
    
बुद्ध का क्या मतलब है जब वह योग और योगाकखेमा (योक से आराम) के बारे में बात करता है।
पधना सुत्त (एएन 4.13) - शब्द के अनुसार शब्द
    
इस सूत में, बुद्ध ने सरम्पादनों की परिभाषा दी है।
अपरहन्नी सूत्त (एएन 4.37) - अनुवादित अनुवाद
    
चार सरल प्रथाओं जो एक दूर पड़ने में असमर्थ हैं, निभना की उपस्थिति में सही हैं।
समाधिविना सुत्त (एएन 4.41) - शब्द के अनुसार शब्द
    
चार प्रकार की एकाग्रता जो बुद्ध की प्रशंसा करती है। यह काफी स्पष्ट है कि समाधि और पाणा के बीच कोई स्पष्ट अंतर नहीं है।
विपुलः सुत्त (एएन 4.4 9) - शब्द के अनुसार शब्द
    
इस सूत में, बुद्ध ने सनना, चित्त और दीघा के चौगुले विरूपण का वर्णन किया है।
अप्पाद सुत्ता (एएन 4.116) - सरल अनुवाद
    
चार उदाहरण जिनमें एक को परिश्रम के साथ अभ्यास करना चाहिए
अथाखा सुत्त (एएन 4.117) - सरल अनुवाद
    
दिमाग की रक्षा करते समय चार चीजें परिश्रम, मस्तिष्क के साथ चलती हैं
मेट्टा सुत्त (एएन 4.125) - अनुवादित अनुवाद
    
यहां बुद्ध बताते हैं कि किस तरह का पुनर्जन्म जो चार ब्रह्मविहारों को
अच्छी तरह से प्रथा करता है, वे उम्मीद कर सकते हैं, और उनके शिष्य होने का
महान लाभ
असाभा सुत्त (एएन 4.163) - बढ़ाया अनुवाद
    
अभ्यास के प्रकार और शक्तियों और आध्यात्मिक तथ्यों की तीव्रता या कमजोरी के अनुसार अभ्यास के चार तरीके,
अभ्यासू सुत्त (एएन 4.254) - बिना अनुवाद के
    
कैसे विभिन्न प्रकार के आगंतुकों का स्वागत करते हुए मेहमान घर के रूप
में विभिन्न धम्मों से जुड़े अभिशन के साथ नोबल पथ काम करता है।
अराणा सुत्ता (एएन 4.262) - अनुवादित अनुवाद
    
जंगल में रहने के लिए किस तरह के व्यक्ति फिट हैं?

—— oooOooo ——

5. पंचक निपाता

विठठित सुत्त (एएन 5.2) - बिना अनुवाद के
    
यहां बुद्ध ने विस्तार से परिभाषित किया है कि वह पांच सेक्ष-बालास (प्रशिक्षण में एक का ताकत) कहता है। यदि
आप पाठ में सुझाए गए सट्टा सद्भूम सूत्रों का संदर्भ देते हैं, तो यह सूत
एक समानांतर अनुवाद की आवश्यकता के बिना आसानी से समझ में आता है।
पाली-अंग्रेज़ी शब्दकोश भी उपलब्ध है, बस के मामले में।
विठठता सुत्त (एएन 5.14) - शब्द के द्वारा शब्द
    
यहां पांच बालाओं को परिभाषित किया गया है
समाज सूत्त (एएन 5.27) - अनुवादित अनुवाद
    
पांच उत्थान ज्ञात है जो असीम एकाग्रता का अभ्यास करता है।
अक्ललार्सर सूत्त (एएन 5.52) - अनुवादित अनुवाद
    
ठीक से बोलते हुए, ‘दोष के संचय’ को क्या कहा जाना चाहिए?
अभिपेक्षकखिताबबाहाना सूत्ता (एएन 5.57) {उद्धरण} - शब्द से शब्द
    
खुद का कम्मा कैसे विचार करें
अनागत्ताय सुत्त (एएन 5.80) - अनुवादित अनुवाद
    
बुद्ध ने भिक्षुओं को याद दिलाया कि धम्म का अभ्यास बाद की तारीख के लिए
नहीं छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि इसमें कोई गारंटी नहीं है कि भविष्य में
अभ्यास के लिए कोई अवसर उपलब्ध होगा।
सेखा सुत्त (एएन 5.89) - बिना अनुवाद के
    
बुद्ध हमें उन पांच चीजों की याद दिलाता है जो इस अभ्यास को बिगड़ते हैं,
जो कि प्रशिक्षण में प्रगति करना चाहते हैं, लगभग सभी के लिए जानना
महत्वपूर्ण है, याद रखने और अपनी जीवन शैली में एकीकृत, जैसा कि पांच मानक
नीवाराओं का ज्ञान है।
सेखा सुत्त (एएन 5.90) ​​- अनुवादित अनुवाद
    
पांच दृष्टिकोण जो अभ्यास की गिरावट का कारण बनते हैं।
सुधाधर सूत्त (एएन 5.96) - अनुवादित अनुवाद
    
पांच गुण हैं, जो लंबे समय में मुक्ति की सांस लेने की सोचता है।
कठा सुत्ता (एएन 5.9 7) - बढ़ाया अनुवाद
    
पांच गुण हैं, जो लंबे समय में मुक्ति की सांस लेने की सोचता है।
अरणिका सुत्ता (एएन 5.98) - अनुवादित अनुवाद
    
पांच गुण हैं, जो लंबे समय में मुक्ति की सांस लेने की सोचता है।
अंधकविन्द सुत्त (एएन 5.114) - अनुवादित अनुवाद
    
पांच चीजें जो बुद्ध ने अपने नवनिर्धारित भिक्षुओं को करने के लिए प्रोत्साहित किया
Samayavimutta सुत्त (एएन 5.149) - बिना अनुवाद के
    
पांच शर्तें जिनके तहत ‘कभी-कभी मुक्ति’ प्राप्त हुई है, वे पीछे हटेंगे।
Samayavimutta सुत्त (एएन 5.150) - बिना अनुवाद के
    
पांच शर्तों का एक और समूह जिसके तहत ‘कभी-कभी मुक्ति’ प्राप्त हुई है, वे पीछे हटेंगे।
वैगज सुत्त (एएन 5.177) - बढ़ाया अनुवाद
    
बुद्ध यहाँ पांच व्यापारों को निर्दिष्ट करते हैं, जिन्हें उनके अनुयायियों द्वारा नहीं लिया जाना चाहिए, जिनमें से मांस का व्यवसाय
गीही सुत्त (एएन 5.179) - अनुवादित अनुवाद
    
इस सूत में, बुद्ध ने जिस तरह से सोटापट्टी के लिए उचित परिस्थितियों का
गठन करने के लिए चार सामान्य सोटापट्टियांगों को अन्तररित किया जाना है, उस
बारे में अधिक सटीकता प्रदान करता है।
निसानिया सुत्त (एएन 5.200) - उन्नत अनुवाद
    
इस सूत्रा ने पांच प्रकार के निसानों को गिरा दिया।
यागु सुत्त (एएन 5.207) - बढ़ाया अनुवाद
    
बुद्ध ने चावल-दलिया खाने के पांच लाभ दिए।
दांतकाः सुत्त (एएन 5.208) - अनुवादित अनुवाद
    
बुद्ध एक दांत क्लीनर का उपयोग करने के लिए पांच कारण बताते हैं।
गीतासर सुत्ता (एएन 5.20 9) - शब्द के द्वारा शब्द
    
इस सूत्त को विभिन्न बौद्ध परंपराओं से काफी हद तक अनदेखी की गई है:
बुद्ध बताते हैं कि वह भक्तों को किसी प्रकार के गुनगुनात्मक जप करने की
अनुमति नहीं देता है।
मुहस्साती सुत्त (एएन 5.210) - अनुवादित अनुवाद
    
उचित सती और सम्पादन के बिना सोते रहने के नुकसान, और उनके साथ ऐसा करने के संबंधित फायदे।
Duccarita सुत्त (एएन 5.245) - बढ़ाया अनुवाद
    
डुक्करिता के पांच खतरों और सूक्रेटा के पांच फायदे के बारे में एक अन्य सूत्ता।
सिथितिका सुत्त (एएन 5.24 9) - बढ़ाया अनुवाद
    
ऐसे पांच तरीके जिनमें एक बीमार व्यक्ति को एक चर्नेल ग्राउंड के समान हो सकता है जहां लोग मृत शरीर फेंक देते हैं।
Puggalappasadha सुत्त (एएन 5.250) - बढ़ाया अनुवाद
    
किसी भी में विश्वास रखने के खतरों के बारे में बुद्ध द्वारा दिए गए एक दुर्लभ चेतावनी यहां दी गई है।
रागास्सा अभिधान सुत्त (एएन 5.303) - बढ़ाया अनुवाद
    
राघ के सीधा ज्ञान के लिए पांच चीजें अभ्यास की जाएंगी।

—— oooOooo ——

6. चक्की निपाता

भद्दा सुत्ता (एएन 6.14) - कुछ जानकारी · बुलबुले
    
शायरीपुत्र बताते हैं कि भिक्खु के बीच क्या फर्क पड़ता है, जिसकी मृत्यु अशुभ होगी और जिसकी मृत्यु शुभ हो जाएगी
अनुताप्पिया सुत्त (एएन 6.15) - कुछ जानकारी · बुलबुले
    
शायरीपुत्र बताते हैं कि एक भिक्खु के बीच का अंतर क्या होता है, जिसकी मृत्यु पछताएगी और जिसकी मृत्यु निर्दोष होगी।
मराठा सुत्त (एएन 6.20) - अनुवादित अनुवाद
    
यह सूत विस्तार से वर्णन करता है कि मौत की दिमाग में कैसे अभ्यास किया जाए।
साम्का सुत्ता (एएन 6.21) - कुछ जानकारी · बुलबुले
    
देवता के हस्तक्षेप से प्रेरित होने के बाद, बुद्ध ने छह कठोर उपाय बताए हैं, जिसके द्वारा कुशाला धम्मों में भिक्ख खराब हो रहा है।
अपरिहायन्य सूत्त (एएन 6.22) - कुछ जानकारी · बुलबुले
    
गैर धमामा गैर-गिरावट से जुड़ा हुआ है। उत्सुक चिकित्सकों के लिए बहुत उपयोगी धम्मों का एक और समूह।
हिमावंत सूत्त (एएन 6.24) - अनुवादित अनुवाद
    
छह गुण जिनके साथ एक ध्यानाकर्षक कथित तौर पर हिमालय के टुकड़ों को तोड़ सकता है।
अनुदेशिधान सुत्त (एएन 6.25) - अनुवादित अनुवाद
    
यह सूत परिभाषित करता है कि याद के छह विषयों क्या हैं।
सेखा सुत्त (एएन 6.31) - बिना अनुवाद के
    
बुद्ध बताते हैं कि प्रशिक्षण के तहत एक भिक्षु की गिरावट के कारण प्रमुख छह धमाम हैं।
नागीता सुत्त (एएन 6.42) - वर्धित अनुवाद
    
वन जंगल में रहने के दौरान, बुद्ध नम्रता, संतोष, अनन्तता, और जंगल में एकांत की स्तुति में बोलता है।
धम्मिका सुत्त (एएन 6.54) - सादे ग्रंथों
    
इस सूत में, शब्दगत शब्द बुद्ध को निर्दिष्ट करने के लिए प्रयोग नहीं
किया जाता है, लेकिन सामान्य ज्ञान में, जो हमें इसके अर्थ का बेहतर समझ
देता है।
निबेदिका सुत्त (एएन 6.63) - सादे ग्रंथों
    
यह सूता कामा, वेदान, सौना, आसावा, कम्मा और दुक्खा का एक दिलचस्प व्यवस्थित विश्लेषण प्रदान करता है। इनमें से प्रत्येक पद को परिभाषित किया गया है और फिर चार आर्य-पापों के पैटर्न के साथ वर्णित किया गया है।
अनवथित्य सुत्त (एएन 6.102) - उन्नत अनुवाद
    
छह पुरस्कार जो एनीका की धारणा को स्थापित करने के लिए प्रेरणा के रूप में कार्य करना चाहिए।
Atammaya सुत्त (एएन 6.104) - बढ़ाया अनुवाद
    
छह पुरस्कार जो अन्त की धारणा को स्थापित करने के लिए प्रेरणा के रूप में कार्य करना चाहिए।
आसाद सुत्त (एएन 6.112) - बढ़ाया अनुवाद
    
आनंद के मस्तिष्क को दूर करने के तरीके, स्वयं के दृष्टिकोण, और आम तौर पर गलत नजरिए।
धम्मंदूपसि सूत्त (एएन 6.118) - शब्द के अनुसार शब्द
    
इस
सूट में दिए गए संदेश को दोहराया जाने वाला है: बिना छुटकारा देकर छह
आदतें जो सतीपहनों को उचित रूप से अभ्यास करने के लिए संभव नहीं है।
काफी कुछ सफाई यहां उपयुक्त हो सकती है।

—— oooOooo ——

7. सट्टा निपता

अनुसू सुत्त (एएन 7.11) - सादे ग्रंथों
    
यहां सात अनूयस सूचीबद्ध हैं।
अनूसया सुत्त (एएन 7.12) - बढ़ाया अनुवाद
    
सात अनूस (त्याग या गुप्त प्रवृत्तियों) को छोड़ने पर
सन सुत्ता (एएन 7.27) - अनुवादित अनुवाद
    
सात धारणाएं जो भिक्खुओं के दीर्घकालिक कल्याण के लिए पैदा होती हैं और उनकी गिरावट को रोकती हैं।
परिधान सुत्त (एएन 7.28) - बढ़ाया अनुवाद
    
सात अंक जिन पर एक भिक्षु प्रशिक्षण में गिरा सकता है या नहीं।
परिधान सुत्त (एएन 7.2 9) - बढ़ाया अनुवाद
    
व्यवहार के सात अंक जिन पर अनुयायी गिरा सकता है या नहीं।
विपत्ति सुत्त (एएन 7.30) - उन्नत अनुवाद
    
व्यवहार के सात अंक जिन पर अनुयायी उसकी / उसकी विफलता या सफलता को पूरा कर सकते हैं
पारभावक सुत्त (एएन 7.31) - अनुवादित अनुवाद
    
व्यवहार के सात अंक जिन पर एक अनुयायी उसकी बर्बादी या समृद्धि को पूरा कर सकता है।
सन सुत्ता (एएन 7.4 9) - अनुवादित अनुवाद
    
सात आंतरिक प्रतिबिंब जो अच्छी तरह से पीछा लायक हैं
नगरोपामा सुत्त (एएन 7.67) - पाली फॉर्मूला के साथ सादे ग्रंथ
    
यहां बुद्ध ने एक समझदार अनुकरण का उपयोग किया है कि यह समझाने के लिए कि
सात अच्छे गुणों को प्रशिक्षुओं द्वारा महारत हासिल करना चाहिए ताकि क्रम
में मन के गढ़ में प्रवेश करने से मार्स (यानी अकुशल धम्मों) के सैनिकों को
रोका जा सके।
सतथसासन सुत्त (ए.एन. 7.83) - शब्द के द्वारा शब्द
    
बुद्ध की अध्यापन क्या है, इसके बारे में भेदभाव करने के लिए यहां एक बहुत संक्षिप्त सातवें निर्देश है।

—— oooOooo ——
8. अखाका निपाता

नंद सुत्त (एएन 8.9) {उद्धरण} - शब्द द्वारा शब्द
    
बुद्ध बताते हैं कि कैसे नंद, हालांकि भयानक भावनाओं का शिकार होने के कारण, अपने निर्देशों के अनुसार पूरी तरह से व्यवहार करता है। इस सूक्ष्म में संतसम्पादन की परिभाषा होती है
महामान सुत्त (एएन 8.25) {उद्धरण} - शब्द के द्वारा शब्द
    
महामा ने बुद्ध को यह परिभाषित करने के लिए कहा है कि एल क्या है
महामान सुत्त (एएन 8.25) {उद्धरण} - शब्द के द्वारा शब्द
    
महाराज बुद्ध को यह निर्धारित करने के लिए पूछते हैं कि अनुयायियों को क्या रखा गया है और अनुयायियों में क्या सम्मानजनक होना चाहिए।
अनुरुपमहत्विक्क सूत्त (एएन 8.30) - कुछ जानकारी · बुलबुले
    
सात बुद्धिमान विचार जो वास्तव में समझने योग्य हैं और याद करने के लिए ven होते हैं। अनुराधा। बुद्ध उनसे आठवें अध्यात्म को सिखाने के लिए आता है, जिसके द्वारा वह अर्रांत्स्थत्व प्राप्त करेगा। बुद्ध तब विस्तार से उन विचारों का अर्थ बताते हैं।
अभिसन्द सुत्त (एएन 8.3 9) - बढ़ाया अनुवाद
    
यहां आठ तरीके हैं जिसमें बुद्ध के सभी गंभीर चेले स्वयं के लिए ज्यादा योग्यता प्राप्त करते हैं।
दुक्कतिट्टीपिप्का सूत्त (एएन 8.40) - कुछ जानकारी · बुलबुले
    
यह सूत्ता मुख्य उपन्यासों के पालन न किए जाने वाले किसी भी प्रकार की पीड़ा का वर्णन करता है।
साख्त्ता सुत्त (एएन 8.53) - शब्द के अनुसार शब्द
    
बुद्ध ने अपनी पूर्व नर्स को आठ मानदंडों को भेदभाव के साथ भेदभाव किया
है कि क्या किसी दिए गए कथन उनके शिक्षण के लिए है या नहीं, जो कि आजकल
आसान हो सकता है।
दीगाजुसू सुत्त (एएन 8.54) {अंश} - सादे ग्रंथों
    
अन्य बातों के अलावा, बुद्ध ने इस सूट में परिभाषित किया है जिसका उदारता से मतलब है।
विमोक्त सुत्त (एएन 8.66) - अनुवादित अनुवाद
    
आठ विमोक्शा (मुक्तता) का एक स्पष्टीकरण
पारीना सुत्त (एएन 8.7 9) - बिना अनुवाद के
    
बुद्ध बताते हैं कि प्रशिक्षण के तहत एक भिक्षु की गिरावट के कारण आठ धमामा हैं।

—— oooOooo ——

9. नवका निपाता

नागा सुत्त (एएन 9.40) - सादे ग्रंथों
    
सूक्ष्म हास्य के साथ रंगा हुआ यह सूत बताता है कि कैसे बढ़े हुए मन का
भिक्खु एक अकेले हाथी के समान है, दोनों जिनमें से आमतौर पर नागा कहा जाता
है
तपुसा सुत्त (एएन 9.41) {उद्धरण} - सादे ग्रंथों
    
यहां सन्यास- वेदैति · निरोड़, सौना और वेदान की समाप्ति नौवें हिस्से के रूप में प्रस्तुत की गई है।
सिक्खुलबुला सूत्त (एएन 9.63) - शब्द के द्वारा शब्द
    
अगर पांच अध्यादेशों में अभी तक सही नहीं है तो क्या करें
निवरारा सुत्त (एएन 9.64) - शब्द के द्वारा शब्द
    
कैसे पांच बाधाओं को दूर करने के लिए

—— oooOooo ——

10. दासका निपाता

साम्योजना सुत्त (एएन 10.13) - सादे ग्रंथों
    
यह बहुत ही छोटी सूट दस सौयोजनों को सूचीबद्ध करता है।
काशी सुत्त (एएन 10.25) - शब्द के द्वारा शब्द
    
यह दस कसीयों पर अभ्यास का मानक वर्णन है।
गिरिमानंद सुत्त (एएन 10.60) - बढ़ाया अनुवाद
    
एक गंभीर बीमारी से गिरिमानंद को ठीक करने में मदद करने के लिए, बुद्ध ने
दस प्रकार के बहुत उपयोगी दृष्टिकोणों की समीक्षा कर एक महान शिक्षण दिया
जो कि विकसित किया जा सकता है।
कथवत्थु सुत्त (एएन 10.6 9) {अंश} - सादे ग्रंथ
    
बुद्ध भिक्षुओं को याद दिलाता है कि उन्हें किस बारे में बात नहीं करनी चाहिए और उनके बारे में क्या बात करनी चाहिए।
कुंडा सुत्त (एएन 10.176) - कुछ जानकारी · बुलबुले
    
बौद्ध शुद्धता का एक गहन अर्थ बताता है, कया, वाका और माने में, न ही
संस्कारों और अनुष्ठानों में है और यह दर्शाता है कि पूर्व उत्तरार्द्ध,
जिसके अकुशलता स्पष्ट हो जाती है।

—— oooOooo ——

11. एकदसाक निपाता

30/03/2555
मेट्टा सुत्त (एएन 11.15) - कुछ जानकारी · बुलबुले
    
ग्यारह अच्छे परिणाम जो कि मेटा के अभ्यास से बाहर आते हैं

—— oooOooo ——


เพลงเกียวกับคำสอนของพระพุทธเจ้า เป็นภาษาฮินดี
youtube.com
https://www.livemint.com/Opinion/DIaSrBKXbAYuTzu5cqbJOK/Narendra-Modi-govts-creative-destruction.html

Murderer of democratic institutions (Modi)’s creative destruction

The Narendra
Modi government’s aim is a radical right-wing revolution—in the economy,
in society, in culture. The current disruptions are a symptom of that
revolution

[A case for Murderer of democratic institutions (Modi).


He’s,
at the end of the day, an ardent and ruthless champion of large capital
and out to smother everybody else with an iron hand, in the process.

And, for heaven’s sake, don’t crib about democracy and all that trash!
Remarkable indeed!



All
this is underpinned by the ruling party’s ideology, which aims to
restore the lost manusmriti glories of stealth,shadowy, discriminatory
hindutva cult, but is, at the same time, a modernizing rather than a
conservative movement. Their use of religion and chauvinism has been a
potent weapon of mass mobilization. It’s a way of papering over the
cracks in a society riven by the fissures of caste, class, language and
culture. It’s a great way to sell capitalism to the masses.
But
these are transient issues. It is far more important to realize that
the Modi is a fundamental break with the past. Its aim is a radical
right-wing revolution—in the economy, in society, in culture. The
current disruptions are a symptom of that revolution.

https://www..livemint.com/Opinion/DIaSrBKXbAYuTzu5cqbJOK/Narendra-Modi-govts-creative-destruction.html

Narendra Modi’’s creative destruction

Modi’s
aim is a radical right-wing revolution—in the economy, in society, in
culture. The current disruptions are a symptom of that revolution


Modi is a fundamental break with the past.

Support
for Modi is not what it used to be. The Reserve Bank of India’s
(RBI’s) survey of consumer confidence found that in December 2017, 50.7%
of those surveyed expected their incomes to increase a year ahead; in
September 2014, 63.9% had said they expected their incomes to go up a
year later.

There
are other straws in the wind—farmers and SC/STs are restive, while the
middle-class mood is reflected in the profusion of jokes about the Prime
Minister on WhatsApp messages, a marked change from earlier.

Public
memory of the corruption, weakness and the dithering on policy of
UPA-II, so reminiscent of the Weimar Republic, seems to be dimming.

RBI’s
consumer confidence survey found that in December 2017, 50.7% of those
surveyed expected their incomes to increase a year ahead. In September,
2014, that percentage stood at 63.9%

And
yet, Modi has set the stage for ushering in a mature capitalism in
the country. The initiatives taken in the last four years will change
the face of the Indian economy. Modi’s demonetisation gambit, together
with the introduction of the goods and services tax (GST), has dealt a
huge blow to petty commodity production and paved the way for an
expansion of the formal sector, as gleeful brokerage reports never tire
of pointing out. The Insolvency and Bankruptcy Code will lead to a rapid
turnaround of stranded assets. The Real Estate (Regulation and
Development) Act, or RERA, besides cleaning the Augean stables in the
sector, will eliminate the smaller and shadier operators. Extending
contract labour to all sectors of the economy will increase “labour
flexibility”. Environment restrictions and regulations have been
whittled down and there has been a massive programme of building
infrastructure.

Consider
the changes on the macro front, such as the decision to bring in an
inflation targeting regime at RBI, bringing down inflation, keeping the
fiscal deficit in check, laying down the red carpet for foreign direct
investment (FDI).

In
politics, Modi has taken steps to transform India into a hard state,
emulating the East Asian model. Not all his policies are working, of
course, but it isn’t for want of trying. No wonder foreign investors are
all praise for him.

Modi
has taken steps to transform India into a hard state, emulating the
East Asian model. Not all his policies are working, but it isn’t for
want of trying
All
this is underpinned by the ruling party’s ideology, which aims to
restore the lost manusmriti glories of stealth,shadowy, discriminatory
hindutva cult, but is, at the same time, a modernizing rather than a
conservative movement. Their use of religion and chauvinism has been a
potent weapon of mass mobilization. It’s a way of papering over the
cracks in a society riven by the fissures of caste, class, language and
culture. It’s a great way to sell capitalism to the masses.

Why
then the recent doubts? One, the party has had to make several populist
concessions, such as loan waivers. The uneasiness is underlined by
utterances such as those of RSS chief Mohan Bhagwat, who last year made
the mystifying statement that only RSS/BJP (Rowdy Rakshasa Swayam Sevaks
/Brashtachar Jiyasdha Psychopathsould rescue the world from the
clutches of capitalism. But this is rhetoric—governments today have
little choice but to put in place the policies that will make them
attractive to global capital. A strong economy is, after all, essential
for Bhagwat’s vision of a strong manusmriti glories of stealth,shadowy,
discriminatory hindutva cult

The
recent sops have been doled out solely on electoral considerations.
Recall that Modi used to have nothing but ridicule for the national
employment guarantee programme. Experts say his promise of higher
minimum support prices for farms may not translate into major gains for
farmers. And note that his ambitious Modicare scheme has private sector
participation.

A
strong Indian economy is, after all, essential for just 0.1%
intolerant, cunnib=ng, crooked , number one terrorists of the world,
violent, militant, ever shooting, lynching, lunatic, mentally rertarded
chitpavan brahmin Rowdy Rakshasa Swayam Sevaks (RSS) chief Mohan
Bhagwat’s vision of a manusmriti glories of stealth,shadowy,
discriminatory hindutva cult.

The
main problem is the reforms being undertaken have a short-term cost.
GST, for instance, has caused a lot of disruption. Cleaning up the banks
is proving to be a Herculean task and it could lead to more caution on
lending, affecting smaller businesses. The spate of scams in banks
hasn’t helped. The bankruptcy code, like GST, is a messy
work-in-progress. The informal economy has been badly hit.

True,
finding decent jobs for people moving away from unviable farming is a
huge challenge, but it’s one common to Third World countries and has led
to what Mike Davis calls a “Planet of Slums”. The global landscape is
fraught with risk, with rumblings of trade wars and lower liquidity in
the markets.

On
the other hand, the economy has turned the corner, investment demand is
picking up and company bottom lines are growing fatter, which should
encourage job growth.

But
these are transient issues. It is far more important to realize that
the Modi is a fundamental break with the past. Its aim is a radical
right-wing revolution—in the economy, in society, in culture. The
current disruptions are a symptom of that revolution.

Manas Chakravarty looks at trends and issues in the financial markets. Respond to this column at manas.c@livemint.com

First Published: Tue, Apr 03 2018. 08 08 AM IST


Peace Is Doable

https://www.ndtv.com/…/modi-second-to-none-in-fake-news-by-…

[While things indeed are looking somewhat grim for the Modi-Shah duo, right at this moment, two things must be kept in mind.

One, another one year is still to go; and that’s a long time in politics.

The readiness with which he, in a jiffy, cooked up a charge of
*treason*, nothing less, against his predecessor and the previous Vice
President of the nation (ref.: <https://twitter.com/officeofrg/status/946038581306441728…>), just to garner some extra votes in a medium-sized state poll, should be enough of an indicator.

Not to forget, he has the whole of the state machinery, with the
autonomy of its various wings severely undermined, at his command.
One must be extra vigilant, not too complacent.

《And things have turned sour. Alwar, Ajmer, Gorakhpur and Phulpur show
that the game’s over. In a year from now - perhaps sooner - the legacy
he leaves behind will be a trail of falsehoods marking the first time an
Indian Prime Minister has turned his high office into an unending
flowing stream of fake news.》]

https://www.ndtv.com/…/modi-second-to-none-in-fake-news-by-…

Modi Second To None In Fake News

Mani Shankar Aiyar

Published: April 05, 2018 13:35 IST

The really unexplained thing about the Modi-Irani kerfuffle over fake
news is that it was Modi, none other, who over-ruled his Minister of
Information & Broadcasting, emerging as the knight in shining armour
slaying the dragon breathing fire against freedom of expression. Has
Modi suddenly become our democracy’s last beacon of hope?

I yield
to none in acknowledging Modi’s expertise in fake news. For surely no
one in our contemporary politics has propagated and profited more from
fake news than Modi has. Three incidents involving me would help me rest
my case.

In December 2017, with the election campaign in Gujarat
in full cry, he got the golden opportunity to turn a losing election
battle in his home state into a marginal victory by uninhibited resort
to fake news. First, when I used the expression “neech kisam ka aadmi”
(a low kind of person) about him, within seconds he distorted it from a
public platform to proclaim - quite falsely - that I had described him
as belonging to a “neech jaati” (lower caste). I had said no such thing.
I would never have said any such thing. But with Goebbelsian genius, he
told that the lie often enough for even my own party to take it to be
the truth.

Hard on the heels of that came the bizarre story,
propagated by Modi himself from election platforms, that I had invited
the Pakistan High Commissioner and a former Foreign Minister of Pakistan
to my home to hatch a conspiracy to foist Ahmed Patel as Chief Minister
of Gujarat - a totally bogus tissue of untruths. He had the gall to
further embellish the fake news by implicating my other guests, who
included a former Prime Minister, a former Vice-President, a former
Chief of Army Staff, a former Minister of External Affairs, a number of
our most distinguished diplomats, and a clutch of highly-respected
professional journalists, in this totally weird and utterly false
conspiracy theory. Indeed, he went so far as to claim that I had gone to
Pakistan to take out a “supari” on him. Rubbish, sickening rubbish.
Yet, the man gets away with it.

Murderer of democratic institutions (Modi)

Modi has cancelled an order that sought to punish journalists for fake news (File photo)

In January 2014, on the eve of the general elections, a TV agency put a
few questions to me about Modi at the on-going plenary session of the
All-India Congress Committee. My comments became “breaking news” as I
was alleged to have called him a “chaiwallah”. The clip is still on
YouTube. You are welcome to see it.

I never used the word
“chaiwallah”. I never said a chaiwallah could not become Murderer of
democratic institutions. I did indeed say I thought Modi unfit for the
job and that, therefore, he would “never, never” be PM.

The one
person who did say he had been a chaiwallah was not me but Modi himself!
I have never believed that to be true. So I ended my interview with a
jibe that if, after losing the coming election, he wanted to resume life
as a tea-vendor, we might be able to make some arrangement for him.

A joke - you might not like the joke, you might even find it in poor
taste - but the fact is that Modi has never really been a chaiwallah:
this is yet another example of Modi-style fake news. (The Vadnagar
railway station at which he claimed to have sold tea was not even built
till 1973, when he was 23!) But over the last four years, I have been
the target of vicious calumny for allegedly saying what he said I had,
and pilloried for what I never said. And all because Modi and his cohort
are the most effective manufacturers and purveyors of fake news that
this country has ever seen.

Seizing the opportunity to claim I
had said what I never had, he started a series of “chai pe charcha”
sessions with holograms of himself at tea-shops that was hailed as a
brilliant example of technology-driven instant political management.
Rajdeep Sardesai went so far as to suggest that I should have been the
recipient of a “thank you” note from Modi for his election victory.
Perhaps. But nothing was more “fake” than attributing to me what I never
said and then going to town with that lie. Of course, he found in
sections of the media willing collaborators to spread the canard. But
the primary propagator of that bit of fake news was none other than the
man who was to go on to score a dramatic upset victory at the polls.
Mussolini would have been proud.

modi chai pe charcha afp 650
Modi had wooed voters in 2014 with his Chai Pe Charcha campaign

Why then is this master generator and propagator of fake news
transmogrifying into a champion of letting everyone have his or her own
democratic say? For fear, I suspect, of getting caught out and becoming a
victim of Irani’s circulars!

That this hypothesis is not quite
as far-fetched as it might appear at first sight is shown by what has
happened to Modi-Shah’s discovery, in 2013-14, of the electoral
potential of social media. Well before any of the other parties lumbered
into spotting the mass reach of social media, the Modi team ratcheted
up the technology to spread its enticing, if wholly false, tale of
“achhe din” and 15 lakhs in every pocket to befool the public into
giving Modi his startling mandate. Indeed, even opposition parties,
including the Congress, were so impressed by these hijinks that they in
turn hired (for a while) the same instrument of propaganda that had
brought Modi to high office.

But communications technology, like
any weapon of war, can be turned into the very instrument of the first
user’s own destruction. So, as political parties, and, far more
importantly, the common garden or average netizen, began realizing that
the Prime Minister and his cohort had no monopoly over social media,
they started using the same technology to take down and mock Modi and
his government. The jokes circulating now on a daily basis in their
hundreds are no more about “Pappu” but principally about Modi and his
Sancho Panza. (My current favourite is that things are in such a mess,
it should be called the “Modi “!) The first users of social media to
spread fake news now find themselves hoist with their own petard. The
world is now sneering at them.

So, if the Irani circular had been
allowed to prevail, the principal instrument of Modi’s electoral appeal
- lies, their manufacture and dissemination - is, after four years of
jumlas, jugaad, incumbency and failure to deliver, being turned on the
originator. Modi, therefore, wary of saving what remains of his
political skin, turned Irani into his scapegoat after first, in all
probability, putting Irani up to her tricks (for not a leaf moves in
this dispensation but with the nod of He Himself). I am, of course,
guessing but I can think of no other convincing reason for Modi
abandoning his protégé the instant matters began turning sour.

And things have turned sour. Alwar, Ajmer, Gorakhpur and Phulpur show
that the game’s over. In a year from now - perhaps sooner - the legacy
he leaves behind will be a trail of falsehoods marking the first time an
Indian Prime Minister has turned his high office into an unending
flowing stream of fake news.

(Mani Shankar Aiyar is former Congress MP, Lok Sabha and Rajya Sabha.)


Peace Is Doable

https://scroll.in/…/somebody-has-done-black-magic-on-modi-m…> and <https://www.outlookindia.com/…/i-wouldnt-trust-her-w…/293992
Good Cop, Bad Cop? ‘Murderer of democratic institutions (Modi) Overrules Smriti Irani, Cancels “Fake News” Order: 10 Points’
3 Apr at 7:18 PM

[Btw, an eminent Modi stooges, chamcha, chela had once famously
observed that she won’t trust Irani even with jam and pickle ministry.
And, also something a bit beyond.
(Ref.: <https://scroll.in/…/somebody-has-done-black-magic-on-modi-m…> and <https://www.outlookindia.com/…/i-wouldnt-trust-her-w…/293992>.)

Irani is, btw, a bit of enigma.
At least, on the face of it.
First, a person with no college degree, hardly any organistional clout
to speak of, landed the plum post of a Cabinet Minister, that too the
HRD Ministry under her armpit.
She often punches, which turn out to be, well above her weight.
She got snubbed, in the process, on quite a few occassions, but never lost her status as a Cabinet Minister.
Now in charge of yet another plum ministry: I&B.

《After it was widely attacked as a brazen attempt to curb freedom of
the press in an election year, Prime Minister Narendra Modi today
cancelled an order that sought to punish journalists for fake news. The
order was issued late last night by the Information and Broadcasting
Ministry, which is headed by Smriti Irani. After top editors and
opposition parties accused the government of trying to control the
media, Ms Irani tweeted this morning that she was open to suggestions on
how to modify the order and tackle fake news. It wasn’t enough. Around
10 minutes later, the Prime Minister’s Office said that the
controversial order was withdrawn.》]

Modi Overrules Smriti Irani, Cancels “Fake News” Order: 10 Points
The “Fake News” order was issued by the Information and Broadcasting
Ministry, headed by Smriti Irani. PM Narendra Modi overruled the order.

All India | Edited by Deepshikha Ghosh | Updated: April 03, 2018 17:44 IST
Modi Overrules Smriti Irani, Cancels ‘Fake News’ Order: 10 Points
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Fake news issue: Modi cancelled the order issued last evening on PIB accreditation

NEW DELHI: After it was widely attacked as a brazen attempt to curb
freedom of the press in an election year, Modi today cancelled an order
that sought to punish journalists for fake news. The order was issued
late last night by the Information and Broadcasting Ministry, which is
headed by Smriti Irani. After top editors and opposition parties accused
the government of trying to control the media, Ms Irani tweeted this
morning that she was open to suggestions on how to modify the order and
tackle fake news. It wasn’t enough. Around 10 minutes later, the Prime
Minister’s Office said the controversial order was withdrawn.

Here is your 10-point cheat sheet to this big story:

1. Modi’s Office also said the question of checking fake news should be left to media watchdog Press Council of India.

2. Here’s why Smriti Irani’s move triggered such a backlash. The need
to stop fake news is widely acknowledged, but the order said that any
complaint against a journalist accused of running fake news meant that
their government accreditation would be immediately suspended.

3.
The two main regulatory bodies for the print and broadcast media would
have 15 days to decide whether the journalist was guilty.

4.
Senior editors said the move was designed to give the government more
control over the news. They said suspending a journalist’s access to
government events and news conferences before the inquiry against them
was completed was unfair.

5. Journalists also questioned the
deadline for the inquiry because it was decided without consulting those
who regulate print and TV media.

6. The ministry did not define
“fake news” but said complaints about it in print would be referred for
determination to the Press Council of India, with suspected cases on
television going to the National Broadcasters Association.

7.
Shekhar Gupta, a former editor of the Indian Express newspaper, said it
was “a breathtaking assault on mainstream media”, and urged journalists
to resist it.

8. Congress leader Ahmed Patel questioned whether
the guidelines were aimed at preventing journalists from reporting news
uncomfortable to the establishment.

9. “What is guarantee that
these rules will not be misused to harass honest reporters? Is it not
possible that motivated complaints will be filed to suspend
accreditation until enquiry is on?” Ahmed Patel tweeted.

10.
Smriti Irani responded: “Glad to see you awake Ahmed Patel ji. Whether a
News article / broadcast is fake or not will be determined by PCI &
NBA; both of whom I’m sure you know are not controlled/ operated by
GOI.”


Peace Is Doable


The academician discusses the disappointment with Narendra Modi’s government and vents ire against Smriti Irani.
scroll.in

https://www.ndtv.com/…/modi-second-to-none-in-fake-news-by-…

[While things indeed are looking somewhat grim for the Modi-Shah duo, right at this moment, two things must be kept in mind.

One, another one year is still to go; and that’s a long time in politics.

The readiness with which he, in a jiffy, cooked up a charge of
*treason*, nothing less, against his predecessor and the previous Vice
President of the nation (ref.: <https://twitter.com/officeofrg/status/946038581306441728…>), just to garner some extra votes in a medium-sized state poll, should be enough of an indicator.

Not to forget, he has the whole of the state machinery, with the
autonomy of its various wings severely undermined, at his command.
One must be extra vigilant, not too complacent.

《And things have turned sour. Alwar, Ajmer, Gorakhpur and Phulpur show
that the game’s over. In a year from now - perhaps sooner - the legacy
he leaves behind will be a trail of falsehoods marking the first time an
Indian Prime Minister has turned his high office into an unending
flowing stream of fake news.》]

https://www.ndtv.com/…/modi-second-to-none-in-fake-news-by-…

Modi Second To None In Fake News

Mani Shankar Aiyar

Published: April 05, 2018 13:35 IST

The really unexplained thing about the Modi-Irani kerfuffle over fake
news is that it was Modi, none other, who over-ruled his Minister of
Information & Broadcasting, emerging as the knight in shining armour
slaying the dragon breathing fire against freedom of expression. Has
Modi suddenly become our democracy’s last beacon of hope?

I yield
to none in acknowledging Modi’s expertise in fake news. For surely no
one in our contemporary politics has propagated and profited more from
fake news than Modi has. Three incidents involving me would help me rest
my case.

In December 2017, with the election campaign in Gujarat
in full cry, he got the golden opportunity to turn a losing election
battle in his home state into a marginal victory by uninhibited resort
to fake news. First, when I used the expression “neech kisam ka aadmi”
(a low kind of person) about him, within seconds he distorted it from a
public platform to proclaim - quite falsely - that I had described him
as belonging to a “neech jaati” (lower caste). I had said no such thing.
I would never have said any such thing. But with Goebbelsian genius, he
told that the lie often enough for even my own party to take it to be
the truth.

Hard on the heels of that came the bizarre story,
propagated by Modi himself from election platforms, that I had invited
the Pakistan High Commissioner and a former Foreign Minister of Pakistan
to my home to hatch a conspiracy to foist Ahmed Patel as Chief Minister
of Gujarat - a totally bogus tissue of untruths. He had the gall to
further embellish the fake news by implicating my other guests, who
included a former Prime Minister, a former Vice-President, a former
Chief of Army Staff, a former Minister of External Affairs, a number of
our most distinguished diplomats, and a clutch of highly-respected
professional journalists, in this totally weird and utterly false
conspiracy theory. Indeed, he went so far as to claim that I had gone to
Pakistan to take out a “supari” on him. Rubbish, sickening rubbish.
Yet, the man gets away with it.

Murderer of democratic institutions (Modi)

Modi has cancelled an order that sought to punish journalists for fake news (File photo)

In January 2014, on the eve of the general elections, a TV agency put a
few questions to me about Modi at the on-going plenary session of the
All-India Congress Committee. My comments became “breaking news” as I
was alleged to have called him a “chaiwallah”. The clip is still on
YouTube. You are welcome to see it.

I never used the word
“chaiwallah”. I never said a chaiwallah could not become Murderer of
democratic institutions. I did indeed say I thought Modi unfit for the
job and that, therefore, he would “never, never” be PM.

The one
person who did say he had been a chaiwallah was not me but Modi himself!
I have never believed that to be true. So I ended my interview with a
jibe that if, after losing the coming election, he wanted to resume life
as a tea-vendor, we might be able to make some arrangement for him.

A joke - you might not like the joke, you might even find it in poor
taste - but the fact is that Modi has never really been a chaiwallah:
this is yet another example of Modi-style fake news. (The Vadnagar
railway station at which he claimed to have sold tea was not even built
till 1973, when he was 23!) But over the last four years, I have been
the target of vicious calumny for allegedly saying what he said I had,
and pilloried for what I never said. And all because Modi and his cohort
are the most effective manufacturers and purveyors of fake news that
this country has ever seen.

Seizing the opportunity to claim I
had said what I never had, he started a series of “chai pe charcha”
sessions with holograms of himself at tea-shops that was hailed as a
brilliant example of technology-driven instant political management.
Rajdeep Sardesai went so far as to suggest that I should have been the
recipient of a “thank you” note from Modi for his election victory.
Perhaps. But nothing was more “fake” than attributing to me what I never
said and then going to town with that lie. Of course, he found in
sections of the media willing collaborators to spread the canard. But
the primary propagator of that bit of fake news was none other than the
man who was to go on to score a dramatic upset victory at the polls.
Mussolini would have been proud.

modi chai pe charcha afp 650
Modi had wooed voters in 2014 with his Chai Pe Charcha campaign

Why then is this master generator and propagator of fake news
transmogrifying into a champion of letting everyone have his or her own
democratic say? For fear, I suspect, of getting caught out and becoming a
victim of Irani’s circulars!

That this hypothesis is not quite
as far-fetched as it might appear at first sight is shown by what has
happened to Modi-Shah’s discovery, in 2013-14, of the electoral
potential of social media. Well before any of the other parties lumbered
into spotting the mass reach of social media, the Modi team ratcheted
up the technology to spread its enticing, if wholly false, tale of
“achhe din” and 15 lakhs in every pocket to befool the public into
giving Modi his startling mandate. Indeed, even opposition parties,
including the Congress, were so impressed by these hijinks that they in
turn hired (for a while) the same instrument of propaganda that had
brought Modi to high office.

But communications technology, like
any weapon of war, can be turned into the very instrument of the first
user’s own destruction. So, as political parties, and, far more
importantly, the common garden or average netizen, began realizing that
the Prime Minister and his cohort had no monopoly over social media,
they started using the same technology to take down and mock Modi and
his government. The jokes circulating now on a daily basis in their
hundreds are no more about “Pappu” but principally about Modi and his
Sancho Panza. (My current favourite is that things are in such a mess,
it should be called the “Modi “!) The first users of social media to
spread fake news now find themselves hoist with their own petard. The
world is now sneering at them.

So, if the Irani circular had been
allowed to prevail, the principal instrument of Modi’s electoral appeal
- lies, their manufacture and dissemination - is, after four years of
jumlas, jugaad, incumbency and failure to deliver, being turned on the
originator. Modi, therefore, wary of saving what remains of his
political skin, turned Irani into his scapegoat after first, in all
probability, putting Irani up to her tricks (for not a leaf moves in
this dispensation but with the nod of He Himself). I am, of course,
guessing but I can think of no other convincing reason for Modi
abandoning his protégé the instant matters began turning sour.

And things have turned sour. Alwar, Ajmer, Gorakhpur and Phulpur show
that the game’s over. In a year from now - perhaps sooner - the legacy
he leaves behind will be a trail of falsehoods marking the first time an
Indian Prime Minister has turned his high office into an unending
flowing stream of fake news.

(Mani Shankar Aiyar is former Congress MP, Lok Sabha and Rajya Sabha.)


Peace Is Doable



https://www.livemint.com/…/Narendra-Modi-govts-creative-des…
Murderer of democratic institutions (Modi)’s creative destruction
The Narendra Modi government’s aim is a radical right-wing
revolution—in the economy, in society, in culture. The current
disruptions are a symptom of that revolution

[A case for Murderer of democratic institutions (Modi).

He’s, at the end of the day, an ardent and ruthless champion of large
capital and out to smother everybody else with an iron hand, in the
process.

And, for heaven’s sake, don’t crib about democracy and all that trash!
Remarkable indeed!

All this is underpinned by the ruling party’s ideology, which aims to
restore the lost manusmriti glories of stealth,shadowy, discriminatory
hindutva cult, but is, at the same time, a modernizing rather than a
conservative movement. Their use of religion and chauvinism has been a
potent weapon of mass mobilization. It’s a way of papering over the
cracks in a society riven by the fissures of caste, class, language and
culture. It’s a great way to sell capitalism to the masses.


But these are transient issues. It is far more important to realize that
the Modi is a fundamental break with the past. Its aim is a radical
right-wing revolution—in the economy, in society, in culture. The
current disruptions are a symptom of that revolution.

https://invalid.invalid/…/Narendra-Modi-govts-creative-dest…

Narendra Modi’’s creative destruction

Modi’s aim is a radical right-wing revolution—in the economy, in
society, in culture. The current disruptions are a symptom of that
revolution

Modi is a fundamental break with the past.

Support for Modi is not what it used to be. The Reserve Bank of India’s
(RBI’s) survey of consumer confidence found that in December 2017, 50.7%
of those surveyed expected their incomes to increase a year ahead; in
September 2014, 63.9% had said they expected their incomes to go up a
year later.

There are other straws in the wind—farmers and SC/STs
are restive, while the middle-class mood is reflected in the profusion
of jokes about the Prime Minister on WhatsApp messages, a marked change
from earlier.

Public memory of the corruption, weakness and the
dithering on policy of UPA-II, so reminiscent of the Weimar Republic,
seems to be dimming.

RBI’s consumer confidence survey found that
in December 2017, 50.7% of those surveyed expected their incomes to
increase a year ahead. In September, 2014, that percentage stood at
63.9%

And yet, Modi has set the stage for ushering in a mature
capitalism in the country. The initiatives taken in the last four years
will change the face of the Indian economy. Modi’s demonetisation
gambit, together with the introduction of the goods and services tax
(GST), has dealt a huge blow to petty commodity production and paved the
way for an expansion of the formal sector, as gleeful brokerage reports
never tire of pointing out. The Insolvency and Bankruptcy Code will
lead to a rapid turnaround of stranded assets. The Real Estate
(Regulation and Development) Act, or RERA, besides cleaning the Augean
stables in the sector, will eliminate the smaller and shadier operators.
Extending contract labour to all sectors of the economy will increase
“labour flexibility”. Environment restrictions and regulations have been
whittled down and there has been a massive programme of building
infrastructure.

Consider the changes on the macro front, such as
the decision to bring in an inflation targeting regime at RBI, bringing
down inflation, keeping the fiscal deficit in check, laying down the red
carpet for foreign direct investment (FDI).

In politics, Modi
has taken steps to transform India into a hard state, emulating the East
Asian model. Not all his policies are working, of course, but it isn’t
for want of trying. No wonder foreign investors are all praise for him.

Modi has taken steps to transform India into a hard state, emulating
the East Asian model. Not all his policies are working, but it isn’t for
want of trying
All this is underpinned by the ruling party’s
ideology, which aims to restore the lost manusmriti glories of
stealth,shadowy, discriminatory hindutva cult, but is, at the same time,
a modernizing rather than a conservative movement. Their use of
religion and chauvinism has been a potent weapon of mass mobilization.
It’s a way of papering over the cracks in a society riven by the
fissures of caste, class, language and culture. It’s a great way to sell
capitalism to the masses.

Why then the recent doubts? One, the
party has had to make several populist concessions, such as loan
waivers. The uneasiness is underlined by utterances such as those of RSS
chief Mohan Bhagwat, who last year made the mystifying statement that
only RSS/BJP (Rowdy Rakshasa Swayam Sevaks /Brashtachar Jiyasdha
Psychopathsould rescue the world from the clutches of capitalism. But
this is rhetoric—governments today have little choice but to put in
place the policies that will make them attractive to global capital. A
strong economy is, after all, essential for Bhagwat’s vision of a strong
manusmriti glories of stealth,shadowy, discriminatory hindutva cult

The recent sops have been doled out solely on electoral considerations.
Recall that Modi used to have nothing but ridicule for the national
employment guarantee programme. Experts say his promise of higher
minimum support prices for farms may not translate into major gains for
farmers. And note that his ambitious Modicare scheme has private sector
participation.

A strong Indian economy is, after all, essential
for just 0.1% intolerant, cunnib=ng, crooked , number one terrorists of
the world, violent, militant, ever shooting, lynching, lunatic, mentally
rertarded chitpavan brahmin Rowdy Rakshasa Swayam Sevaks (RSS) chief
Mohan Bhagwat’s vision of a manusmriti glories of stealth,shadowy,
discriminatory hindutva cult.

The main problem is the reforms
being undertaken have a short-term cost. GST, for instance, has caused a
lot of disruption. Cleaning up the banks is proving to be a Herculean
task and it could lead to more caution on lending, affecting smaller
businesses. The spate of scams in banks hasn’t helped. The bankruptcy
code, like GST, is a messy work-in-progress. The informal economy has
been badly hit.

True, finding decent jobs for people moving away
from unviable farming is a huge challenge, but it’s one common to Third
World countries and has led to what Mike Davis calls a “Planet of
Slums”. The global landscape is fraught with risk, with rumblings of
trade wars and lower liquidity in the markets.

On the other hand,
the economy has turned the corner, investment demand is picking up and
company bottom lines are growing fatter, which should encourage job
growth.

But these are transient issues. It is far more important
to realize that the Modi is a fundamental break with the past. Its aim
is a radical right-wing revolution—in the economy, in society, in
culture. The current disruptions are a symptom of that revolution.

Manas Chakravarty looks at trends and issues in the financial markets. Respond to this column at manas.c@livemint.com

First Published: Tue, Apr 03 2018. 08 08 AM IST


Peace Is Doable

http://indianexpress.com/…/sc-st-act-govt-told-apex-court-…/
The Cat Just Leaps Out Of The Bag! ‘SC/ST act: Govt told apex court to
keep anticipatory bail clause (diluting the Act), says amicus curiae’

[《The Centre may have tried to distance itself from the Supreme Court
ruling on the Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of
Atrocities) Act but senior advocate Amarendra Sharan, amicus curiae in
the matter, Tuesday said it was the government which told the apex court
that anticipatory bail should be given in case no prima facie case is
made out under the Act.》]

http://indianexpress.com/…/sc-st-act-govt-told-apex-court-…/

SC/ST act: Govt told apex court to keep anticipatory bail clause, says amicus curiae
In the Supreme Court Tuesday, Attorney General K K Venugopal urged the
bench to reconsider its directions which decreed that permission should
be taken before making an arrest under the Act.

Written by Seema Chishti | New Delhi | Published: April 4, 2018 3:41:06 am

“The Union of India had submitted that anticipatory bail could be given
in case there is no prima facie case being made out under the Scheduled
Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act. Even the
data regarding misuse of the Act was provided by the learned ASG,”
Sharan told The Indian Express.

The Centre may have tried to
distance itself from the Supreme Court ruling on the Scheduled Castes
and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act but senior advocate
Amarendra Sharan, amicus curiae in the matter, Tuesday said it was the
government which told the apex court that anticipatory bail should be
given in case no prima facie case is made out under the Act.

“The
Union of India had submitted that anticipatory bail could be given in
case there is no prima facie case being made out under the Scheduled
Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act. Even the
data regarding misuse of the Act was provided by the learned ASG,”
Sharan told The Indian Express.

Referring to the protests Monday
by Dalits who alleged dilution of the Act, Sharan underlined the role of
the state and said: “No court can have verdicts issued under pressure
from a mob or political compulsions of any sort… reports from Madhya
Pradesh say that the police didn’t fire — someone else did and lives
were lost. We need to be able to protect our SC and ST citizens too. The
state must take responsibility for it and no innocent life must be
lot.”

In the Supreme Court Tuesday, Attorney General K K
Venugopal urged the bench to reconsider its directions which decreed
that permission should be taken before making an arrest under the Act.

In a 35-page report, the amicus curiae had argued for Section 18 of the
Act to be struck off as it was not in consonance with the Constitution.
According to the report, Section 18 did not stand the test of
constitutionality as enshrined under Articles 14 and 21 and was to be
declared ultra vires.

The report of the amicus curiae was in
three parts — the first part dealt with the merits of the case in
question; part two on guidelines to be followed before making an arrest
under the Act; and, part three that contested the constitutionality of
Section 18.


Peace Is Doable


In
the Supreme Court Tuesday, Attorney General K K Venugopal urged the
bench to reconsider its directions which decreed that permission should
be taken before…
indianexpress.com

https://theprint.in/…/smriti-iranis-ib-ministry-medi…/46941/

>
> The RFID proposal, or the now-aborted move to regulate fake news,
are not the first such by the NDA government that gives the impression
it wants to regulate the media.
>
> Earlier, the I&B
ministry had issued an order warning officers to refrain from talking to
the media without permissions from relevant authorities or face action,
citing the PIB’s Information Dissemination Manual of 2017.
>
>
> https://theprint.in/…/smriti-iranis-ib-ministry-medi…/46941/
> Journalists participate in a protest | Burhaan Kinu/Hindustan
Times via Getty Images Journalists participate in a protest | Burhaan
Kinu/Hindustan Times via Getty Images
>
> Press
Information Bureau wrote to the home ministry in January asking if media
accreditation cards could be replaced with RFID cards to enhance
security.
>
> New Delhi: The Press Information Bureau, the
central government’s nodal body for official communication, is working
on a proposal to track the movement of journalists at government
buildings and offices through radio-frequency identification (RFID)
cards, ThePrint has learnt.
>
> The PIB is the
government’s media wing under the Smriti Irani-led information and
broadcasting ministry. The ministry triggered a huge controversy with
its order Monday to punish journalists for publishing or propagating
“fake news”. The furore against the move caused Prime Minister Narendra
Modi to order a roll-back in less than 24 hours.
>
> In
another proposal that is certain to raise the hackles of journalists in
the national capital, the PIB wrote to the union home ministry in
January asking if the accreditation cards it issues to journalists could
be replaced with RFID cards.
>
> The home ministry is
considering the proposal, although top ministry sources told ThePrint
that it could be impractical to implement.
>
> Frank
Noronha, the Principal Director-General of PIB, confirmed the move. But
he also said there has been no progress on the proposal. PIB, he said,
is only exploring options available for improving the security, use,
look and other features of the existing accreditation card.
>
> “We routinely explore what options are available to improve the
card to facilitate free and easy entry and exit into government
buildings on the basis of different technological advances,” Noronha
told ThePrint in response to queries. “However, nothing has been done to
this effect as yet.”
>
> A home ministry spokesman did not respond to queries until the time of publication of this report.
> What is RFID and how can it track journalists?
>
> Press accreditation cards are issued by the government-appointed
Central Press Accreditation Committee, which is headed by the
director-general of the PIB. Nearly 3,000 cards are issued annually to
reporters, photographers, TV cameramen and editors after a stringent
vetting process.
>
> RFID technology uses electromagnetic
fields to identify and track tags attached to objects. The tags contain
electronically-stored information. The technology is used in smart cards
and tags such as modern-day vehicle registration certificates, driving
licences, metro rail cards and even toll tags.
>
> At
present, journalists visiting government buildings have to only show
their accreditation cards to the security guards. If ‘passive’ RFID is
implemented, they would need to swipe/punch the card at the entrance. On
the other hand, ‘active’ RFID technology would mean that a sensor picks
up the frequency of the card and either lets one pass through or alerts
security. Either way, the government can track journalists’ entry, exit
and possibly who they are meeting.
>
> The PIB has been
contemplating increasing the security features of the card after several
confidential documents were leaked from the petroleum ministry in 2015.
> Problems in implementing RFID proposal
>
> Home ministry sources said carrying out such an exercise would
need massive new infrastructure and a huge budget. Security turnstile
gates and other infrastructure work would have to be put in place for
all the 56 buildings under the MHA’s ambit, apart from procuring RFID
cards for thousands of journalists.
>
> There would be
other logistical difficulties too, such as differentiating journalists
from the lakhs of other government employees accessing the buildings
every day, the sources said.
>
> The RFID proposal, or the
now-aborted move to regulate fake news, are not the first such by the
NDA government that give the impression it wants to regulate the media.
>
> Earlier, the I&B ministry had issued an order warning officers
to refrain from talking to the media without permissions from relevant
authorities or face action, citing the PIB’s Information Dissemination
Manual of 2017.
>
__._,_.___
Posted by: Rebecca Kurian
Reply via web post • Reply to sender • Reply to group • Start a New Topic • Messages in this topic (1)
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Press
Information Bureau wrote to the home ministry in January asking if
media accreditation cards could be replaced with RFID cards to enhance
security.
theprint.in


https://www.urdumediamonitor.com/…/everyone-praised-the-im…/

Are these double standards or not? How tragic that everything that happens in our country is
coloured in “religious” prejudices! Human Rights or plain “good conscience” seem to be missing!
Are lives of citizens of the minority communities without any value? Will we ever get out of this
crazy mindset?

>
> Indeed the police has ultimately now registered the case. But if
the case is not fought strongly in the court of law one wonders how many
more innocent youths would be preyed upon by the terrorists. Therefore,
this is the duty of Muslim organisations to respect the bereaved Imam’s
feelings and pressurise the administration and the police to meet the
demand of justice and bring the killers to book and make sure that they
get death sentence for mob lynching and burning the deceased so that no
one is mob lynched and killed again as brutally as Sibghatullah was and
no other father has to shed tears on the death of his minor son and no
brother has to bear the loss of a brother like Ataullah has had to.
>
>
>
> https://www.urdumediamonitor.com/…/everyone-praised-the-im…/
>
> alt
>
> By Mahdi Hasan Aini Qasmi
>
> The only thing that is being reported by the media is the appeal
to his followers by Maulana Imdadullah Rashidi, the Khateeb of Noorani
Masjid Asansol to remain calm and maintain peace and not to retaliate
following the brutal killing of his son Hafiz Sibghatullah Rashidi.
However no one seems to have felt his pain; nor has anyone taken notice
of what he had said as a mourning father.
>
> Describing
the cold blooded murder of his minor son he said, ‘On 28 April he had
gone to the mosque to read Qur’an. Upon hearing the commotion he went
out to find out what was going on. The mob then dragged and took him
away with them.’
>
> ‘My elder son went to police
station to report the incident and seek their help in recovering his
brother. But the police after verifying the identity of the child taken
away, instead of helping him in anyway behaved in objectionable manner
and locked him up in the prison cell. Our local councillor somehow
managed to have him released by the night.
>
> The Imam
added, ‘My elder son went to police station to report the incident and
seek their help in recovering his brother. But the police after
verifying the identity of the child taken away, instead of helping him
in anyway behaved in objectionable manner and locked him up in the
prison cell. Our local councillor somehow managed to have him released
by the night.
>
> ‘In the morning we were informed that a
dead body had been brought in the hospital. That dead body was of my
son. I am trying to resist my tears but cannot do so. My son’s finger
nails were pulled and torn off and he was burnt. He was attacked with
knives. Blood was still oozing out of his body even he was dead. They
had killed my son no doubt but at least they should not have burnt his
body.’
>
> Even after going through such a tragedy, the
Imam tried to and succeeded in mollifying the angry mob [that was bent
upon retaliating] and led it by example. It was an example of great
self-control and nerves and mountain-like strong character and faith he
displayed was exemplary. But should the case file relating to the murder
of Sibghatullah Rashidi be now closed? Should his family maintain
silence and say nothing more without his murderers being brought to
justice?
>
> How outrageous and shameful has been police’s
conduct in this whole episode? Should the culpability of the murder of
this innocent teenager not be determined? Why are human rights bodies
and advocacy groups silent?
>
> Indeed the police has
ultimately now registered the case. But if the case is not fought
strongly in the court of law one wonders how many more innocent youths
would be preyed upon by the terrorists. Therefore, this is the duty of
Muslim organisations to respect the bereaved Imam’s feelings and
pressurise the administration and the police to meet the demand of
justice and bring the killers to book and make sure that they get death
sentence for mob lynching and burning the deceased so that no one is mob
lynched and killed again as brutally as Sibghatullah was and no other
father has to shed tears on the death of his minor son and no brother
has to bear the loss of a brother like Ataullah has had to.
>
> Translated by Urdu Media Monitor.Com from UNA News


By
Mahdi Hasan Aini Qasmi The only thing that is being reported by the
media is the appeal to his followers by Maulana Imdadullah Rashidi, the
Khateeb of Noorani…
urdumediamonitor.com


https://scroll.in/…/reading-list-eight-articles-on-the-judi…

7 hours ago
Updated 7 hours ago.
Scroll Staff

JUDICIAL SYSTEM
Reading list: Eight articles on the judicial crisis that has led to an impeachment campaign
The CPI(M) has been lobbying for an impeachment motion against the
chief justice of India after four senior judges expressed concern over
his administration.

Reading list: Eight articles on the judicial crisis that has led to an impeachment campaign
Chief Justice of India Dipak Misra | PTI

Several Opposition parties in the country are likely to introduce an
impeachment motion against Chief Justice of India Dipak Misra in the
Rajya Sabha on Thursday, reports said. On Tuesday, top Opposition
leaders held a meeting to formulate their stand on the proposal, The
Times of India quoted unidentified party officials as saying.

Communist Party of India (Marxist) chief Sitaram Yechury has been
lobbying to garner support for an impeachment motion after four senior
judges of the Supreme Court – Jasti Chelameswar, Rajan Gogoi, Madan B
Lokur and Kurian Joseph – held an unprecedented press conference on
January 12 to express concerns about the court’s functioning under
Misra.

Most parties, including the Congress, have been
tight-lipped about their role in the impeachment motion. The Nationalist
Congress Party and the Communist Party of India (Marxist) are two of
the few who have gone on record to acknowledge their participation.
Nationalist Congress Party leader DP Tripathi said he had signed draft
petition, ANI reported.

An impeachment motion requires the
signatures of at least 50 members in the Upper House or 100 MPs of the
Lok Sabha and must be submitted to the presiding officer of either
House, who will set up a committee to examine it. Only if the committee
is convinced that the motion has merit will it be debated and voted on.
To pass, the motion must be supported by the majority membership of the
House and not less two-thirds of the members present and voting.

Here are eight articles on crisis in the Indian judiciary.

1. What happened in the Supreme Court on Friday (and what is the MCI
bribery case)?: In a heated proceedings on November 10, Chief Justice
Dipak Misra said a bench would be formed to hear petitions seeking
independent probe into the case.

2. ‘The Supreme Court has
ended as an institution’: 10 reads on November’s judicial drama:
Allegations of impropriety and heated arguments gave legal commentators
plenty to chew on this week.

3. Full text: ‘The Chief Justice is
only the first amongst the equals – nothing more or nothing less’: Four
Supreme Court judges wrote this letter to the Chief Justice of India
asking him to address a crisis, but they say it has remained unanswered.

4. Chelameswar letter text: ‘Bonhomie between judiciary,
government sounds death knell to democracy’: In a letter to Chief
Justice Dipak Misra on March 21, Justice Chelameswar sought a full court
sitting to discuss government interference in the judiciary

5.
Congress considering option of moving impeachment proceedings against
Chief Justice Dipak Misra: A senior lawyer who the Congress consulted
said the party would back the four judges who revolted on Friday.

6. The crisis in the Supreme Court will not just blow over. Staying
silent is not the answer: The potential of the judges’ press conference
to become the beginning of a deep introspection and structural reform
seems to be withering away.

7. It isn’t just the Supreme Court
that’s divided – the Bar is, too: While most of lawyers’ associations
wanted the matter to be resolved internally, the solutions suggested
differed.

8. As Chief Justice Dipak Misra is backed into a
corner, the Indian judiciary’s authority is at stake: The Congress is
moving to impeach him while Justice J Chelameswar wants a full court
sitting to discuss the executive’s interference in judicial functioning.


Peace Is Doable


The
CPI(M) has been lobbying for an impeachment motion against the chief
justice of India after four senior judges expressed concern over his
administration.
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